Maharashtra Shiv Sena UBT Rebellion: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ठीक चार साल पुराना इतिहास खुद को दोहराने की राह पर चल पड़ा है. जून के इस तपते महीने में शिवसेना (UBT) के भीतर भूचाल आ गया है. उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है, जिसके बाद महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन बागियों की बल्ले-बल्ले हो रही है. एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे ने उन्हें कारण बताओ नोटिस थमाया है, वहीं दूसरी तरफ महायुति सरकार ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए इन बागी सांसदों को Y+ श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा कवच से नवाज दिया है.
सूत्रों के मुताबिक, ये बागी सांसद 21 जून को दिल्ली में कोई बड़ा एलान कर सकते हैं. याद दिला दें कि ठीक चार साल पहले, 21 जून 2022 को ही एकनाथ शिंदे ने तत्कालीन महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था. अब ठीक उसी तारीख को उद्धव गुट के 6 सांसद अपनी ही पार्टी को दूसरा सबसे बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं.
इस सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई में शिवसेना (UBT) संसदीय दल की एक आपात बैठक बुलाई थी. पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से इस बैठक में केवल 3 सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए. बाकी के 6 सांसद इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह नदारद रहे. इस खुली अवज्ञा से नाराज होकर पार्टी प्रवक्ता संजय राउत और अरविंद सावंत ने इसे ‘सीधी गद्दारी’ करार दिया है.
शिवसेना (UBT) नेतृत्व ने आनन-फानन में इन सभी 6 बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है और दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत इनकी सदस्यता रद्द करने की तैयारी शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के इस कानूनी हंटर के जवाब में बागी सांसदों ने भी अपनी अभेद्य रणनीति तैयार कर ली है.
सूत्रों का दावा है कि इन बागी सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को पत्र लिखकर संसद में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है. कानूनी रूप से अपनी सांसदी बचाने के लिए ये सांसद संसद के भीतर एक अलग गुट का गठन करेंगे, जिसके नए नेता संजय बंडू जाधव बन सकते हैं. इस अलग गुट को मान्यता मिलने के तुरंत बाद, 22 जून को दिल्ली में इन सभी की मौजूदगी में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में इस विद्रोही गुट के औपचारिक विलय की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा.
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यह खेल अब पूरी तरह से दिल्ली दरबार (लोकसभा अध्यक्ष) के फैसले पर टिक गया है. बागी सांसद फिलहाल स्पीकर के आधिकारिक रुख का इंतजार कर रहे हैं. यदि लोकसभा अध्यक्ष इस बागी गुट को अलग मान्यता दे देते हैं, तो उद्धव ठाकरे के पास संसद में महज 3 सांसद रह जाएंगे, जो उनके राष्ट्रीय राजनीतिक रसूख के लिए एक अपूरणीय क्षति होगी. 21 जून की ऐतिहासिक तारीख को होने वाले बड़े एलान और 22 जून को शिंदे गुट में संभावित विलय ने यह साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पार्टी और सिंबल’ छीनने का जो पार्ट-1 विधानसभा में दिखा था, उसका पार्ट-2 अब देश की संसद में दोहराया जाने वाला है.
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