Jharkhand Rajya Sabha Election: भारतीय राजनीति में इस वक्त ‘खेला होबे’ का एक ऐसा खतरनाक पैटर्न चल पड़ा है, जिसने स्थापित राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है. पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संसदीय दल में भारी बिखराव दिखा, फिर महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के भीतर ठीक 21 जून की तारीख को चार साल पुराना इतिहास दोहराते हुए सांसदों की बगावत का भूचाल आया और अब इस सियासी आग की लपटें झारखंड तक पहुंच चुकी हैं. महाराष्ट्र और बंगाल के बाद अब झारखंड की धरती एक ऐसे ही ऐतिहासिक और अप्रत्याशित ‘पॉलिटिकल सस्पेंस ड्रामे’ की गवाह बनी है, जिसने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर अविश्वास की एक गहरी खाई खोद दी है.
झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने न सिर्फ विपक्षी एकजुटता के दावों की हवा निकाल दी है, बल्कि कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को एक-दूसरे के खून का प्यासा बना दिया है. पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद एनडीए (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की इस जादुई और झन्नाटेदार जीत ने विपक्षी खेमे में वो ‘क्रॉस वोटिंग’ का बम फोड़ा है, जिसके बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू और राजद नेतृत्व आमने-सामने आ गए हैं.
झारखंड की इस राज्यसभा जंग में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार के पीछे का गणित बेहद चौंकाने वाला है. सदन में सत्ताधारी गठबंधन के पास प्रचंड बहुमत था; जिसमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और सीपीआई-एमएल (CPI-ML) के 2 विधायक शामिल थे. दूसरी तरफ, एनडीए के पाले में सिर्फ 24 विधायकों का समर्थन था.
परिमल नाथवानी को जीत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए कम से कम 4 अतिरिक्त विधायकों के वोटों की जरूरत थी. लेकिन जब बैलट बॉक्स खुला, तो परिमल नाथवानी के खाते में पूरे 28 वोट निकले! यानी विपक्षी गठबंधन के कम से कम 4 विधायकों ने चुपके से पाला बदलते हुए एनडीए के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ कर दी.
इस शर्मनाक शिकस्त के बाद झारखंड में ‘इंडिया’ ब्लॉक के भीतर आंतरिक युद्ध छिड़ गया है. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने सीधे तौर पर सहयोगी दल आरजेडी (RJD) पर पीठ में छुरा घोंपने और गद्दारी करने के कई गंभीर आरोप मढ़ दिए. कांग्रेस प्रभारी के आरोपों पर तुरंत पलटवार करते हुए अगले ही दिन आरजेडी ने भी तीखे बाण छोड़े और कांग्रेस की अपनी सांगठनिक कमजोरी को इस हार का जिम्मेदार ठहराया.
इस बीच, कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह इस कदर बढ़ गई है कि पार्टी के अधिकांश विधायक अपनी ही लीडरशिप से नाराज दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, प्रभारी के. राजू ने डैमेज कंट्रोल करते हुए यह साफ किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का जो बचा हुआ सरप्लस वोट था, वह ईमानदारी से कांग्रेस को मिला, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद भी ज्ञापित किया.
जैसे ही परिमल नाथवानी की जीत की आधिकारिक घोषणा हुई, झारखंड का सियासी परिदृश्य पूरी तरह बदल गया. नाथवानी सीधे रांची स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ समेत बीजेपी के तमाम वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी और माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया.
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दूसरी ओर, जेएमएम खेमे में राहत की सांस देखी गई. नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय पहुंचकर सीएम हेमंत सोरेन से सौजन्य मुलाकात की. मुख्यमंत्री सोरेन ने बैद्यनाथ राम को बुके भेंट कर उन्हें उच्च सदन का सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई दी. लेकिन इस शिष्टाचार के पीछे, कांग्रेस और आरजेडी के बीच खिंची तलवारें यह बता रही हैं कि झारखंड का यह ‘खेला’ आने वाले दिनों में हेमंत सोरेन सरकार के स्थायित्व के लिए एक नया सिरदर्द बनने जा रहा है.
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