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मालदा हिंसा का ‘मास्टरमाइंड’ गिरफ्तार: बागडोगरा एयरपोर्ट से भागने की फिराक में था AIMIM नेता, अब NIA कसेगी शिकंजा!

Malda West Bengal Case Update: पश्चिम बंगाल के मालदा (कालियाचक) में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने के मामले में बंगाल सीआईडी (CID) को बड़ी कामयाबी मिली है. इस पूरे खौफनाक घटनाक्रम का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम शुक्रवार सुबह बागडोगरा एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया.

बता दें कि पुलिस की मुस्तैदी के चलते वह राज्य छोड़कर भागने में नाकाम रहा. सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और मामले की जांच एनआईए (NIA) को सौंपे जाने के बाद यह इस केस की अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है.

बागडोगरा एयरपोर्ट पर कैसे बिछाया जाल?

सीआईडी को गुप्त सूचना मिली थी कि मास्टरमाइंड मोफक्कारुल इस्लाम गिरफ्तारी से बचने के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है. पुलिस की विशेष टीम ने एयरपोर्ट परिसर की घेराबंदी की और जैसे ही आरोपी वहां पहुंचा, उसे दबोच लिया गया.

एडीजी नॉर्थ बंगाल के. जयरामन ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि मोफक्कारुल पर भीड़ को उकसाने और जजों के घेराव की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं. उत्तर दिनाजपुर का रहने वाला यह वकील सोशल मीडिया पर बेहद प्रभावशाली है, जिसके करीब 30 लाख (3 Million) फॉलोअर्स हैं.

जानिए मोफक्कारुल का सियासी कनेक्शन

मोफक्कारुल इस्लाम का प्रोफाइल काफी हाई-प्रोफाइल है. उसने 2021 में इटाहार विधानसभा सीट से AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ा था. वह सीएए (CAA), एनआरसी (NRC) और अब मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय के बीच सोशल मीडिया के जरिए लगातार सक्रिय रहा है.

जांच में सामने आया है कि इस कांड के तार केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि गिरफ्तार किए गए 35 आरोपियों में से कई का संबंध ISF और AIMIM जैसे दलों से है. मोथाबारी से ISF उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली भी पहले ही 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजे जा चुके हैं.

यह भी पढ़ें: राघव चड्ढा बदलेंगे रास्ता! AAP को दिया तगड़ा जवाब, बोले-‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं’

SC के निर्देश पर अब NIA संभालेगी मोर्चा

सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने की एक “ढीठ कोशिश” करार दिया है. कोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद चुनाव आयोग ने पूरे मामले की जांच एनआईए (NIA) को सौंप दी है. एनआईए अब इस बात की तहकीकात करेगी कि क्या जजों का घेराव किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय या आतंकी साजिश का हिस्सा था.

कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. फिलहाल, चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति के कहीं भी भीड़ इकट्ठा होने या जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध है और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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