कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र से दखल देने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि कावेरी नदी से जुड़े किसी भी बड़े प्रोजेक्ट पर फैसला लेने से पहले निचले तटवर्ती राज्यों के हितों और उनके अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है.
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में राज्यसभा में जलशक्ति मंत्रालय की ओर से दिए गए एक जवाब का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मंत्रालय के जवाब में यह बताया गया कि 16 फरवरी 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है कि कर्नाटक को कावेरी नदी पर किसी भी निर्माण कार्य से पहले निचले राज्यों की सहमति लेनी होगी.
विजय ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मौजूदा कानूनी स्थिति और पहले से तय न्यायिक फैसलों को पूरी तरह ध्यान में रखकर नहीं दिया गया है. उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच अलमट्टी बांध मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले की ओर भी आकर्षित किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में साफ किया था कि नदी के निचले हिस्से में स्थित राज्यों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी राज्य अन्य नदी किनारे वाले राज्यों की सहमति और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना ऐसा निर्माण नहीं कर सकता, जिससे नदी के प्रवाह या पानी के बंटवारे पर असर पड़े.
उन्होंने यह भी कहा कि कावेरी जल विवाद से जुड़े फैसलों और ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार हर राज्य को अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल करने का अधिकार है, लेकिन यह इस्तेमाल तय नियमों के खिलाफ नहीं होना चाहिए. इसलिए मेकेदातु बांध जैसे किसी भी प्रोजेक्ट की पूरी तकनीकी और कानूनी जांच जरूरी है.
विजय ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि कावेरी नदी केवल पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत के करोड़ों लोगों, खासकर किसानों के जीवन से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि नदी के पानी के प्रवाह और वितरण से जुड़े निचले राज्यों के अधिकारों की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें ताकि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और कावेरी जल विवाद से जुड़े समझौतों का सम्मान बना रहे. उन्होंने कहा कि न्याय, संघीय व्यवस्था और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई कदम उठाया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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