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1.11 करोड़ युवा हुनरमंद, लाखों को रोजगार; PMKVY के जरिए 24.38 लाख युवाओं की बदली किस्मत

PMKVY Youth Employment: केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 1.0 से पीएमकेवीवाई 3.0 के तहत अब तक कुल 1.11 करोड़ उम्मीदवारों को प्रमाणित (सर्टिफाई) किया गया है, जिनमें से शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग घटक के अंतर्गत 24.38 लाख उम्मीदवारों को रोजगार मिलने की जानकारी दर्ज की गई है.

कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि पीएमकेवीवाई 4.0 में युवाओं को अपनी पसंद के अनुसार विभिन्न करियर विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है. इसी कारण इस चरण में रोजगार (प्लेसमेंट) से संबंधित आंकड़ों की निगरानी नहीं की जाती है.

युवाओ को कौशल प्रदान करना है लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि सरकार का ‘स्किल इंडिया मिशन’ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से संचालित क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम जैसी विभिन्न योजनाओं के जरिए युवाओं को स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग का प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है.

सरकार के अनुसार, इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप और नई तकनीकों से जुड़ी कौशल क्षमता प्रदान करना है, ताकि वे रोजगार बाजार की बदलती मांगों के अनुसार तैयार हो सकें.

साइबर सुरक्षा और ग्रीन टेक्नोलॉजी क्षेत्र में दिया जा रहा प्रशिक्षण

सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 से लागू पीएमकेवीवाई 4.0 में भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत आने वाले प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (सीटीएस) के तहत राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप 170 पाठ्यक्रम तैयार किए हैं. इनमें 32 नए दौर की तकनीकों और फ्यूचर स्किल्स से जुड़े कोर्स शामिल हैं. इन पाठ्यक्रमों का संचालन देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से किया जा रहा है.

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सरकार ने यह भी बताया कि समय-समय पर स्किल गैप स्टडी कराई जाती है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की मांग और प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता का आकलन किया जा सके. इन अध्ययनों के आधार पर सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों में आवश्यक बदलाव करती है. सेक्टर स्किल काउंसिल्स (एसएससी) ने इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सहित कई क्षेत्रों में स्किल गैप स्टडी कर मानव संसाधन की मांग और उपलब्धता का आकलन तैयार किया है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

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