नई दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अहम मुलाकात हुई. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और रूस के रिश्तों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की. बातचीत का दायरा सिर्फ रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापार, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषय भी चर्चा में रहे.
मुलाकात की शुरुआत दोनों नेताओं के गर्मजोशी से गले मिलने से हुई. इस साल मोदी और पुतिन की यह दूसरी आमने-सामने की बैठक है. इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे.
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल के महान कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भी भेंट किया. इस प्राचीन ग्रंथ में जीवन, समाज, शासन और नैतिकता के साथ-साथ खेती और किसानों से जुड़े विषयों पर भी महत्वपूर्ण विचार मिलते हैं.
दोनों नेताओं ने भारत-रूस आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी बात की. रेल क्षेत्र और सुरंग निर्माण में औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का मुद्दा सामने आया. इसके साथ ही इस्पात की पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने और दोनों देशों की कंपनियों के बीच कारोबारी अवसर बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.
भारत की कंपनियां रूसी बाजार में ज्यादा सक्रिय हों और उन्हें वहां कारोबार के नए मौके मिलें, इस दिशा में भी संभावनाओं पर विचार किया गया. यानी बातचीत का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित रहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को जमीन पर और मजबूत कैसे बनाया जाए.
बैठक में असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. ईंधन चक्र और परियोजनाओं के लंबे समय तक संचालन से जुड़े सहयोग को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार किया गया.
इसके अलावा रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने, महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और उर्वरक क्षेत्र में रणनीतिक संयुक्त उपक्रम शुरू करने जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे.
द्विपक्षीय रिश्तों के साथ-साथ दोनों नेताओं ने दुनिया के मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पर भी विचार किया. पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में जारी संघर्षों से पैदा हुई परिस्थितियों पर बातचीत हुई. खास तौर पर इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चर्चा की गई.
प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत के रुख को साफ करते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई. मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
इससे पहले दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान भी मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी. वहीं, 31 अगस्त को बिश्केक में हुई पिछली बैठक में दोनों नेताओं ने 24 अगस्त को मॉस्को में हुई 27वें भारत-रूस अंतर-सरकारी व्यापार, आर्थिक और सांस्कृतिक आयोग की बैठक के नतीजों का स्वागत किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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