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रियल लाइफ हीरो थे नाना पाटेकर, कारगिल युद्ध में लिया था हिस्सा, द्रास से कुपवाड़ा तक दुश्मनों से लिया था लोहा

Nana Patekar Kargil War: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज निधन हो गया. एक एक्टर, एक इनवेस्टर, एक जिंदादिल इंसान के अलावा नाना कि एक और पहचान थी और वो थी इंडियन आर्मी के एक सैनिक की. नाना पाटेकर सिर्फ पर्दे पर ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में एक देशभक्त थे. यहां तक कि उन्होंने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था. जहां वो करीब 60 दिनों तक जम्मू-कश्मीर के कई संवेदनशील इलाकों में रहे और देश के दुश्मनों को खत्म किया.

इस बात का खुलासा खुद नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू के दौरान किया था. जहां यह सवाल पूछे जाने पर कि वो कभी इसका जिक्र क्यों नहीं करते तब जो नाना ने जवाब दिया, वो लोगों के दिलों में आज भी जिंदा है. उन्होंने कहा कि देशभक्ति प्रचार का विषय नहीं है. यह तो खुद से देश के लिए देने जैसा है.

नाना पाटेकर ने बताया कि जिस समय कारगिल युद्ध चल रहा था उस समय देश के रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस थे. उनकी रक्षा मंत्री से परिचय था और वो खुद इस युद्ध में भाग लेना चाहते थे. नाना बताते हैं कि इसको लेकर उन्होंने खुद जॉर्ज फर्नांडिस से बात की थी.

नेशनल लेवल के निशानेबाज थे नाना पाटेकर

नाना कहते हैं कि उन्होंने कमांडो कोर्स पूरा किया था और वो एक अच्छे निशानेबाज भी रहे हैं. वो नेशनल लेवल पर राइफल शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और 300 मीटर शूटिंग में मेडल भी जीत चुके हैं. इसी अनुभव के आधार पर वो सेना के अधिकारियों से बातचीत कर कारगिल जाने की इच्छा जताई.

जिसे सेना ने यह कहकर ठुकरा दिया कि वो एक सिविलियन हैं. जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से बात की. नाना कहते हैं कि उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि अगर सिविलियन को 6 महीने के अनुभव के आधार पर सेना में कमीशन दिया जा सकता है तो उन्होंने क्यों नहीं. वो भी तब जब उन्होंने 3 साल का प्रशिक्षण लिया है.

दो महीने तक सेना का हिस्सा रहे नाना

नाना पाटेकर बताते हैं कि कारगिल युद्ध के समय वो देशभक्ति में लबरेज थे और देश के लिए कुछ करना चाहते थे. इसलिए जब रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने अधिकारियों को सेना में शामिल करने के लिए आदेश दिया तो वो बहुत खुश हुए.

इस दिग्गज अभिनेता ने बताया कि रक्षा मंत्री ने उनसे जब पूछा कि तुम कब सेना जॉइन करना चाहते हो तो मेरा जवाब सुनकर वो चौंक गए. नाना ने रक्षा मंत्री को बताया कि वो आज ही सेना जॉइन करना चाहते हैं. यह सुनकर जॉर्ज फर्नांडिस भी हक्के-बक्के रह गए. इसके बाद वो कारगिल पहुंच गए और दो महीने तक देश के अहम इलाकों में सेना की कार्रवाई में हिस्सा लिया.

कागरिल में इन जगहों पर थे तैनात

नाना बताते हैं कि कारगिल युद्ध के समय वो द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर सहित कई जगहों पर तैनात रहे. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि सेना में वो क्या काम करते थे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि इस बारे में वो ज्यादा नहीं बता सकते.

हालांकि उन्होंने इस बारे में संकेत जरूर दिया. नाना पाटेकर ने बताया कि वो भारतीय सेना के क्विक एक्शन टीम जैसी यूनिट के साथ जुड़े थे. नाना बताते हैं कि जब वो सेना में गए थे तब उनका वजन करीब 76 किलो था, सिर्फ दो महीने में जब वो घर लौटे तो उनका वजन 56 किलो रह गया.

अजीत डोभाल थे खास दोस्त

इंटरव्यू करने वाले ने जब उनसे पूछा कि उन्होंने क्यों इस बारे में सबसे जिक्र नहीं किया. तो उनका जवाब बेहद ही गंभीर और सीख देने वाली थी. उन्होंने कहा था कि सेना से जुड़ने के बारे में बताना कोई उपलब्धि नहीं है. ये तो खुद को खुशी देने के लिए था कि चलो हम देश के लिए कुछ तो किये.

ये भी पढ़ें- ‘सुशांत सिंह राजपूत केस में बॉलीवुड के खोले थे राज…’, बेबाक नाना पाटेकर का निधन, पुणे के 27 एकड़ वाले फार्महाउस में अंतिम संस्कार

नाना पाटेकर और अजीत डोभाल गहरे दोस्त थे. उन्होंने बताया कि अजीत डोभाल उनके लिए बड़े भाई जैसे हैं. यह सिर्फ एक दोस्ती भर नहीं बल्कि अलग तरह का रिश्ता है जो पद और पहचान से कहीं ऊपर है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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