राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के बीच राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में दो महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं. पहली बैठक शनिवार को हुई, जबकि दूसरी और अधिक विस्तृत बैठक गुरुवार को आयोजित की गई. इन बैठकों में दोनों संगठनों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया और राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर गहन चर्चा की.
शनिवार को हुई प्रारंभिक बैठक में आरएसएस के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री मोहम्मद अफज़ाल और राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री शाहिद सईद सहित कई अधिकारियों ने भाग लिया. इस बैठक के दौरान, देश में सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और साझा राष्ट्रीय हित के मुद्दों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी समझ और भाईचारे को बढ़ावा देने पर जोर दिया. इस बैठक को दोनों संगठनों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग की प्रक्रिया का एक हिस्सा माना गया.
गुरुवार को हुई दूसरी बैठक अधिक महत्वपूर्ण और व्यापक थी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं आरएसएस सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने की. इस बैठक में आपसी सहयोग, सामंजस्य और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया. श्री भागवत ने बैठक में मौजूद मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान के लिए प्रोत्साहित किया.
इस ऐतिहासिक बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह (कार्यकारी प्रमुख) डॉ. कृष्ण गोपाल, संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख राम लाल जी और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक तथा आरएसएस के एक महत्वपूर्ण नेता डॉ. इंद्रेश कुमार विशेष रूप से मौजूद रहे. इसके अलावा, अखिल भारतीय सम्पर्क टोली के सदस्य कृष्ण कुमार, एमआरएम के संयोजक प्रोफेसर (डॉ.) शाहिद अख्तर, संयोजक डॉ. माजिद अहमद तालिकोटी, संयोजक मोहम्मद अफज़ाल, डॉ. शालिनी अली और फोरम के सभी अधिकारियों तथा सैल्स के सभी राष्ट्रीय संयोजकों ने भी बैठक में हिस्सा लिया.
आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने बैठक में अपने विचार रखते हुए संवाद, विचार-विमर्श और सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अधिकारियों ने बताया कि आरएसएस प्रमुख ने हमेशा उनका मार्गदर्शन किया है और देश के निर्माण एवं विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया है. अधिकारियों ने कहा कि यह सहयोग समाज की समग्र प्रगति और राष्ट्रीय सामंजस्य के लिए लाभदायक सिद्ध होता रहेगा. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना वर्ष 2002 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन में हुई थी और तब से यह संगठन देशभर के मुस्लिम समुदाय के बीच राष्ट्रवादी विचारधारा को बढ़ावा देने का काम कर रहा है. इन बैठकों को दोनों इन बैठकों को दोनों संगठनों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान देना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना है.
-भारत एक्सप्रेस
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