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श्रीनगर में उपराज्यपाल से डॉ. इंद्रेश कुमार की मुलाकात, वक़्फ़ अधिनियम पर पुस्तक भेंट कर साझा संस्कृति और एकता का संदेश

डॉ. इंद्रेश कुमार ने श्रीनगर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा वक़्फ़ अधिनियम पर लिखी पुस्तक भेंट किया. इस अवसर पर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति, सामाजिक एकता और सभी समुदायों के योगदान पर जोर दिया.

श्रीनगर के राजभवन के पावन प्रांगण में एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण उभरा, जब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) द्वारा लिखित ‘वक्फ अधिनियम’ पर आधारित पुस्तक, प्रख्यात नेता डॉ. इंद्रेश कुमार ने माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा को भेंट की. यह कोई सामान्य पुस्तक विनिमय नहीं था. यह ग्रंथ भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और कानूनी ज्ञान का प्रतीक था, जो विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है.

 एकता का संदेश

डॉ. कुमार के शब्दों में इतिहास का गंभीर सत्य झलक रहा था “हमारे पूर्वज एक हैं, हमारी मातृभूमि एक है, हमारा तिरंगा एक है. हम सभी हिंदुस्तानी हैं. मिलकर हमें इस प्यारे देश को शांति, भाईचारे, प्रगति और समृद्धि के पथ पर ले जाना है.” उनका यह भाषण, जिसमें देशभक्ति की गहरी छाप थी, भारत की बहुलवादी संस्कृति की मिसाल बन गया. एनसीएमईआई के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रो. शाहिद अख्तर, डॉ. नसीब अली और दीपक कुमार जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने इस पर सहमति जताई.

नेतृत्व को श्रद्धांजलि

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया स्वतंत्रता दिवस भाषण की सराहना भी की गई. डॉ. कुमार ने लाल किले से आरएसएस के बारे में दिए गए मोदी के “सत्यपरक और निडर संदेश” को “राष्ट्रीय एकता की साहसिक अभिव्यक्ति” बताया. यह स्वीकारोक्ति सरकार के उन प्रयासों को रेखांकित करती है जो वैचारिक मतभेदों को पाटते हुए भारत की समग्र पहचान का उत्सव मनाते हैं.

 कार्रवाई का आह्वान

यह मुलाकात केवल रस्म अदायगी नहीं थी. यह एक ऐसा आह्वान था जो यह स्वीकार करता है कि भले ही भारतीय विभिन्न धर्मों और समुदायों से आते हैं, परंतु ‘हिंदुस्तानी’ के रूप में उनकी साझा पहचान अटूट है. डॉ. कुमार ने दृढ़ता से कहा, “जब तक एकता का यह सूत्र मजबूत है, तब तक यह राष्ट्र भी अजेय रहेगा.” इस कार्यक्रम में डॉ. भीमराव अंबेडकर के “हम सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं” के दर्शन और भगवद गीता की उस शाश्वत शिक्षा की गूंज थी जो सतही विभाजनों से परे सामंजस्य सिखाती है.

भारत की एकीकृत की शक्ति

मतभेदों से बंटी दुनिया में, श्रीनगर का राजभवन भारत की एकीकृत शक्ति का प्रतीक बन गया. ‘वक्फ अधिनियम’ की पुस्तक, जो देखने में एक साधारण सी भेंट लगती है, देश की सहनशक्ति का रूपक बन गई. यह याद दिलाती है कि एकता, शिव के रुद्राक्ष माला की तरह, विभिन्न तत्वों को अटूट बंधन में बांधती है.

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भारत एक्सप्रेस



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