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NCW की साइबर कानूनों पर अंतिम समीक्षा: 8 क्षेत्रीय विचार-विमर्श, 300 सुझाव और 205 प्रमुख सिफारिशें

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने साइबर कानूनों पर अपनी अंतिम समीक्षा बैठक सफलतापूर्वक संपन्न की. विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में आठ क्षेत्रीय विचार-विमर्श, 300 विशेषज्ञ सुझाव, और 205 प्रमुख सिफारिशों को अंतिम रूप दिया गया. इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए कानूनों को अधिक प्रभावी बनाना है.

इस बैठक में कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि इसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर ने की. इस समीक्षा बैठक में कानूनी विशेषज्ञों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, पुलिस अधिकारियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया.

महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों पर चर्चा

आठ क्षेत्रीय परामर्शों के माध्यम से 150 से अधिक विशेषज्ञों की राय ली गई और 300 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए. इन सभी सुझावों की गहन समीक्षा के बाद 205 प्रमुख सिफारिशें तैयार की गईं, जिन्हें अब साइबर कानूनों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा.

विशेषज्ञों के सुझाव और प्रमुख सिफारिशें

इस बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, और महिलाओं के अशोभनीय प्रतिनिधित्व (प्रतिबंध) अधिनियम जैसे कानूनी ढांचे पर विचार-विमर्श किया गया.

महिलाओं की साइबर सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इस विचार-विमर्श के माध्यम से कानूनों की समीक्षा की गई ताकि वे नई डिजिटल चुनौतियों से निपटने में सक्षम हों. आयोग सरकार से इन सिफारिशों को शीघ्र लागू करने की अपील करेगा.

सिफारिशों को शीघ्र लागू करने की अपील

साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने ‘साइबर सहेली’ नामक एक बुकलेट भी लॉन्च की, जिसमें महिलाओं को उनके अधिकारों, साइबर अपराधों से बचाव और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई है.

राष्ट्रीय महिला आयोग जल्द ही इन सिफारिशों को कानून एवं न्याय मंत्रालय को सौंपेगा ताकि आवश्यक कानूनी सुधार किए जा सकें. इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को साइबर अपराधों से बचाना, उनकी डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारत में साइबर कानूनों को अधिक प्रभावी बनाना है.

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-भारत एक्सप्रेस 

मिताली चंदोला, एडिटर, स्पेशल प्रोजेक्ट्स

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