New CDS NS Raja Subramani: भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च पद पर एक बार फिर बदलाव होने जा रहा है. 30 मई 2026 को वर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. उनके बाद देश की तीनों सेनाओं (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) के तालमेल और रणनीतिक कमान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि के हाथों में होगी.
भारत सरकार ने उन्हें देश का नया CDS और सैन्य मामलों के विभाग (DMA) का सचिव नियुक्त किया है. तेज-तर्रार रणनीतिकार और ग्राउंड ऑपरेशंस के मास्टर माने जाने वाले सुब्रमणि की प्रोफाइल यह बताने के लिए काफी है कि उन्हें इस सर्वोच्च पद के लिए क्यों चुना गया.
एक बेहतरीन सैन्य अधिकारी की पहचान उसके जमीनी अनुभव से होती है. सुब्रमणि का करियर इसी का परिचायक है. 14 दिसंबर 1985 को उन्हें गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन मिला था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
जब असम में उग्रवाद चरम पर था, तब उन्होंने वहां चलाए गए ‘ऑपरेशन राइनो’ के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान पूरी मुस्तैदी से संभाली. इसके अलावा उन्होंने आतंकवाद से प्रभावित जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और केंद्रीय क्षेत्र में 17 माउंटेन डिवीजन का सफल नेतृत्व किया. उनकी रणनीतिक क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने पश्चिमी मोर्चे (पाकिस्तान बॉर्डर) पर सबसे अहम मानी जाने वाली ‘2 कोर’ (स्ट्राइक कोर) की भी कमान संभाली है.
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि को सेना के हलकों में एक ‘स्कॉलर-वॉरियर’ (विद्वान-योद्धा) के रूप में जाना जाता है. एनडीए (NDA) और आईएमए (IMA) से बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा हासिल की.
उन्होंने ब्रिटेन के ‘जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज’ से पढ़ाई की है. इसके अलावा, उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर डिग्री और मद्रास विश्वविद्यालय से एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की है. यह वैश्विक शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें आधुनिक युद्ध (Modern Warfare) और भू-राजनीति को गहराई से समझने में मदद करती है.
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सीडीएस नियुक्त होने से पहले सुब्रमणि 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (National Security Council Secretariat) में सैन्य सलाहकार के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे, जहां देश की सुरक्षा से जुड़े सबसे अहम फैसले लिए जाते हैं. इससे पहले वे सेना के उप-प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) और मध्य कमान के चीफ भी रह चुके हैं. उनके इस शानदार 40 साल के करियर और सेवा को देखते हुए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है.
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