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Samrat Chaudhary Cabinet Analysis: पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान गुरुवार को बिहार की एक नई सियासी इबारत का गवाह बना. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली NDA सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है. भव्य मंच और नारों के बीच इस कैबिनेट के जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. इसमें एक तरफ सोशल इंजीनियरिंग की ‘मास्टरक्लास’ दिखती है, तो दूसरी तरफ ‘नारी शक्ति’ के दावों पर सवाल भी खड़े होते हैं.
इस मंत्रिमंडल विस्तार की सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर हो रही है. राजनीति से दूर रहने वाले निशांत को मंत्री बनाकर एनडीए ने एक बड़ा ‘सरप्राइज एलिमेंट’ दिया है. उनके साथ ही बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता जैसे 8 नए चेहरों को जगह देकर भविष्य की लीडरशिप तैयार करने की कोशिश की गई है.
महिला आरक्षण: 33% का दावा, 14% पर सिमटी हकीकत (Women In Samrat Chaudhary Cabinet)
एक तरफ देश में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की गूंज है, वहीं बिहार कैबिनेट में ‘आधी आबादी’ को अधूरा हक मिलता दिख रहा है. 35 सदस्यों वाले इस मंत्रिमंडल में महज 5 महिलाओं को जगह मिली है, जो कुल कैबिनेट का सिर्फ 14.28% (लगभग 14-15%) है. यह आंकड़ा 33% के लक्ष्य से कोसों दूर है.
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महिलाओं को जगह देने के मामले में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बाजी मारी है. 5 में से 3 महिला मंत्री (लेसी सिंह, शीला मंडल और श्वेता गुप्ता) जेडीयू कोटे से हैं. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 15 मंत्रियों के कोटे में से केवल 2 महिला चेहरों (श्रेयसी सिंह और रमा निषाद) को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.
सोशल इंजीनियरिंग का ‘परफेक्ट बैलेंस’ (Samrat Chaudhary Cabinet Social Engineering)
महिलाओं की संख्या भले ही कम हो, लेकिन एनडीए नेतृत्व ने बिहार के ‘कास्ट फैक्टर’ को बेहद बारीकी से साधा है. 35 मंत्रियों के इस मंत्रिमंडल में सवर्णों से लेकर दलितों और अति पिछड़ों तक को लगभग बराबर के अनुपात में सत्ता की चाबी सौंपी गई है. सिर्फ मुस्लिम प्रतिनिधित्व के मामले में आंकड़ा सबसे निचले स्तर पर है.
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कैबिनेट का जातीय गणित (कुल 35 मंत्री) (Samrat Chaudhary Cabinet Ministers List)
- 9 अति पिछड़ा वर्ग (EBC) यानी 25.7%
- 9 पिछड़ा वर्ग (OBC) यीनी 25.7%
- 9 सवर्ण (Upper Caste) यानी 25.7%
- 7 दलित (Dalit) यानी 20.0%
- 1 मुस्लिम (Muslim) यानी 2.8%
आंकड़े स्पष्ट गवाही दे रहे हैं कि बीजेपी और जेडीयू ने सवर्ण, ओबीसी और ईबीसी, तीनों ही बड़े वोट बैंक को खुश रखने के लिए 25.7% – 25.7% का एकदम ‘बैलेंस्ड फॉर्मूला’ अपनाया है. दलित समुदाय को भी 20 फीसदी की मजबूत हिस्सेदारी देकर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की पिच पर बड़ा दांव चला गया है. वहीं, मुस्लिम समुदाय से एकमात्र चेहरा जेडीयू कोटे से ‘जमा खां’ का है.
BJP-JDU के नए चेहरे और समीकरण
बीजेपी ने इस बार मिथिलेश तिवारी, अरुण शंकर प्रसाद और इंजीनियर शैलेंद्र जैसे जमीनी नेताओं पर दांव लगाया है. वहीं जेडीयू ने अपने पुराने किलों को बचाने के साथ-साथ नए चेहरों को मौका दिया है. एकमात्र मुस्लिम चेहरा जमा खां (JDU) के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल है.
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संतुलन की ‘मास्टरक्लास’ अधूरी
राजनीतिक नजरिए से देखें तो सम्राट चौधरी का यह मंत्रिमंडल ‘जातीय संतुलन’ की कसौटी पर तो खरा उतरता है, लेकिन महिलाओं की कम भागीदारी और नीतीश के बेटे की एंट्री ने नए राजनीतिक सवालों को जन्म दे दिया है. क्या यह टीम एनडीए की नैया पार लगा पाएगी?
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