बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के कई फैसलों को राज्य में सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव की अहम वजह माना जाता है. अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है और इसके लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है. ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसले खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण, सामाजिक सुधार और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े कदम देश ही नहीं, विदेशों में भी चर्चा का विषय रहे. उनकी कई योजनाओं को बाद में महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों ने भी अपनाया.
नीतीश सरकार ने पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला किया. इसके बाद स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी और कई राज्यों ने भी इस मॉडल को अपनाया.
महिलाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए बिहार में 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया. पुलिस बल में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 2013 में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार मिला.
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 2006 में जीविका योजना शुरू की गई. आज इस योजना से एक करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जुड़कर आजीविका कमा रही हैं. इसी मॉडल के आधार पर केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर आजीविका मिशन लागू किया.
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी कई योजनाएं शुरू की गईं. कन्या उत्थान योजना और जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव बढ़ा और जन्म पंजीकरण दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ.
नीतीश कुमार ने 2016 में पूरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर सामाजिक सुधार का बड़ा कदम उठाया. सरकार का दावा है कि इससे घरेलू हिंसा में कमी आई और परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ.
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इसके अलावा कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अपराध पर नियंत्रण और राज्य की छवि में बदलाव आया. बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ भी राज्यव्यापी अभियान चलाया गया, जिसमें करोड़ों लोगों ने इन कुरीतियों को खत्म करने का संकल्प लिया.
सरकार ने पिछड़े वर्ग और महिलाओं की साक्षरता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान भी चलाए. ‘अक्षर अंचल’ योजना के तहत लाखों महिलाओं को साक्षर बनाया गया, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को ‘हुनर’ और ‘औजार’ कार्यक्रम के जरिए प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर दिए गए.
इन फैसलों और योजनाओं को बिहार में सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है और आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तराखंड आदि राज्यों ने इन्हें अपने स्तर पर लागू करने की कोशिश की है.
-भारत एक्सप्रेस
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