हाइपरलूप ट्रैक
रिपोर्ट कोमल शर्मा
सुपर फास्ट से भी फास्ट से रोलर कॉस्टर की याद आ जाना स्वाभाविक है लेकिन अब जिस तकनीक के सहारे भारतीय रेल ट्रेन चलने की तैयारी कर रहा है वो ट्रेन बुलेट और हवाई जहाज से भी तेज़ गति से आपको आपके गंतव्य तक पहुंचाने में सक्षम होगी. ये संभव हो पाएगा हाइपरलूप ट्रैक की तकनीक से, जिस पर भारतीय रेल और आई आई टी चेन्नई मिल कर काम कर रहे है. बल्कि इस दिशा में हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक का सफल परीक्षण भी कर लिया गया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद इस काम की प्रगति पर बराबर जानकारी ले रहे हैं.
शनिवार को अपने चेन्नई दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आईआईटी चेन्नई के डिस्कवरी कैंपस में पहुंच कर इस हाइपरलूप ट्रैक और ट्यूब का निरीक्षण किया. इस दौरान रेल मंत्री ने इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले छात्रों से बातचीत की और उनके इस सफल प्रयास के लिए बधाई दी. हाइपरलूप ट्रेन से 300 किलोमीटर की दूरी 30 मिनट से भी कम दूरी में तय होगी. फिलहाल अभी 422 मीटर का हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक आई आई टी चेन्नई के कैंपस में तैयार हैं. उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही ये आम रेल यात्रियों के लिए आने वाले सालों में उपलब्ध होगी.
हाइपरलूप तकनीक में एक वैक्यूम ट्यूब और उसमें खास ट्रैक की सहायता से 600 से 1200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रैन को चलाया जाता है. वर्तमान में जहां दुनिया के बड़े देश इस तकनीक की और और ध्यान दे रहे है वही यूरोप इस तकनीक से न सिर्फ ट्रेन चला रहा है बल्कि 2050 तक यूरोप में पूरी तरह से हाइपरलूप ट्रैक का जाल बिछ जाएगा. ऐसे में विकास की और कदम बढ़ाने और विकसित भारत की बात करने वाले देश भारत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता हैं कि अपने ट्रांसपोर्टेशन को लगातार बेहतर बनाए. इस दिशा में हाइपरलूप ट्रेन एक क्रांति साबित होगी.
-भारत एक्सप्रेस
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