छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों राशन व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है. ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना के तहत लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात उलट नजर आ रहे हैं. राशन दुकानों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, जहां लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी कई बार बिना राशन लिए लौट रहे हैं.
सरकार की ओर से तीन महीने का राशन एक साथ देने की बात कही गई थी, लेकिन हकीकत में कई दुकानों पर सिर्फ एक महीने का ही चावल दिया जा रहा है. कई जगह तो चावल की कमी के कारण दुकानें खुल ही नहीं रही हैं. इससे लोगों को बार-बार राशन दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
लोगों का कहना है कि उन्हें महीनों से नमक और शक्कर नहीं मिल पा रहा है. इससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं. राशन लेने के लिए बार-बार लाइन में लगना पड़ रहा है, जिससे समय और मेहनत दोनों की बर्बादी हो रही है.
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस योजना के कारण दूसरे क्षेत्रों के लोग भी यहां आकर राशन ले रहे हैं. इससे स्थानीय लोगों को पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है और उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है.
दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बन गई है. उन्हें काम छोड़कर राशन के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन कई बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है. अब सवाल उठ रहे हैं कि जब तीन महीने का राशन देने की घोषणा की गई थी तो दुकानों में पर्याप्त अनाज क्यों नहीं पहुंचा. साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि आम लोगों की परेशानियों का समाधान कब तक होगा.
-भारत एक्सप्रेस
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