टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच चल रहे विवाद में अब पारसी समुदाय खुलकर सामने आ गया है. देश और विदेश के कई बड़े पारसी संगठनों ने एकजुट होकर टाटा ट्रस्ट के प्रति अपना समर्थन जताया है और इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है.
पत्र के मुताबिक ये सिर्फ कॉर्पोरेट विवाद नहीं बल्कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान का सवाल है.प्रधानमंत्री को लिखे गए इस पत्र में संगठनों ने साफ कहा है कि इस मामले को केवल एक कॉर्पोरेट या शेयरधारक विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि इसका सीधा असर भारत के सबसे प्रमुख और सम्मानित व्यावसायिक संस्थानों में से एक, टाटा समूह के भविष्य पर पड़ सकता है.
संगठनों ने अपने पत्र में लिखा है यह भारत के सबसे सम्मानित संस्थानों में से एक के भविष्य के स्वरूप और उसके उद्देश्य का सवाल है. एक ऐसा संस्थान जिसकी वैश्विक उपस्थिति और प्रतिष्ठा है.
अपने पत्र में इन संगठनों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप करें और यह सुनिश्चित करें कि टाटा समूह से जुड़े मूल्य, गवर्नेंस का मॉडल और दीर्घकालिक दृष्टिकोण सुरक्षित रहें.
पत्र में कहा गया है कि टाटा संस के स्वामित्व ढांचे में टाटा ट्रस्ट की अहम भूमिका है. यही ढांचा समूह को परोपकार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखते हुए दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम बनाता है.
इन संगठनों ने टाटा संस की प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर चल रही बहस पर भी गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इसे केवल एक नियामक या तकनीकी मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए. इसके प्रभाव कहीं अधिक गहरे और दूरगामी हैं.
पत्र में चेतावनी दी गई है कि कोई भी ऐसा बदलाव जो दीर्घकालिक प्रबंधन और अल्पकालिक बाजार की अपेक्षाओं के बीच के नाजुक संतुलन को बिगाड़ता है, वह टाटा संस और व्यापक रूप से पूरे टाटा समूह के मूल स्वरूप, मूल्यों और उसकी पहचान को प्रभावित कर सकता है.
संगठनों ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया है कि वे मौजूदा चुनौतियों को व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए देखें और टाटा नाम से जुड़ी सौ साल पुरानी विरासत की रक्षा करें.
इस महत्वपूर्ण पत्र पर देश-दुनिया के प्रमुख पारसी संगठनों के हस्ताक्षर हैं जिनमें शामिल हैं.
दरअसल, टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ट्रस्ट्स का मानना है कि टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं कराना चाहिए. ट्रस्ट का तर्क है कि मौजूदा स्वामित्व ढांचा ही दीर्घकालिक निर्णय लेने, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है, जो टाटा समूह की आत्मा है.
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2026 में कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण वापस लेने के लिए टाटा संस द्वारा दिए गए आवेदन को खारिज कर दिया था. RBI के नियमों के अनुसार अपर लेयर NBFC होने के कारण टाटा संस को लिस्ट होना पड़ेगा.
RBI के इस फैसले के बाद टाटा संस का बोर्ड संभावित लिस्टिंग की दिशा में कदम उठाने के लिए सहमत हो गया, जिसका टाटा ट्रस्ट्स ने कड़ा विरोध किया है.
इसी असहमति ने अब टाटा संस के बोर्ड और उसके सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है जिस पर अब पूरे कॉर्पोरेट जगत की नजर है.
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-भारत एक्सप्रेस
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