प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 14 फरवरी को असम के एक बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर पहुंच रहे हैं. चुनावी सरगर्मियों और विकास की राजनीति के बीच पीएम का यह दौरा कई मायनों में खास है. अपनी यात्रा से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य की जनता के प्रति अपना स्नेह और भरोसा जताया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि असम की जनता उन्हें एक बार फिर अपनी सेवा करने का मौका और आशीर्वाद जरूर देगी.
पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में पुरानी यादों को ताजा करते हुए लिखा कि ठीक दस साल पहले असम के लोगों ने भाजपा पर भरोसा जताया था. इन सालों में सरकार ने राज्य के लोगों के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दिन-रात मेहनत की है. उन्होंने गुवाहाटी में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के अपने कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि विकास की यह रफ्तार आगे भी बनी रहेगी.
प्रधानमंत्री के दौरे की शुरुआत डिब्रूगढ़ से होगी. सुबह करीब 10:30 बजे वे मोरन बाईपास पर बनी ‘इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी’ (ELF) पर उतरेंगे. पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है. यह सिर्फ एक रनवे नहीं है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भारत की एक बड़ी मजबूती है. युद्ध जैसी स्थिति हो या कोई प्राकृतिक आपदा, यह इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप बचाव और राहत कार्यों में गेम-चेंजर साबित होगी. यहां भारी भरकम लड़ाकू विमान और परिवहन विमान आसानी से उतर सकेंगे.
असम अब सिर्फ चाय और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के लिए भी पहचाना जाएगा. प्रधानमंत्री इस दौरे पर आईआईएम (IIM) गुवाहाटी का उद्घाटन करेंगे. यह पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए एक बड़ा तोहफा है, जिससे उन्हें प्रबंधन की पढ़ाई के लिए दूसरे बड़े शहरों की तरफ नहीं भागना पड़ेगा. साथ ही, यह देश भर के मेधावी छात्रों को असम की तरफ आकर्षित करेगा.
इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण ब्रह्मपुत्र नदी पर बना ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ है. करीब 3,030 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 6-लेन का पुल इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है. यह पूर्वोत्तर का पहला ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ पुल है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दूरी को तय करने में घंटों लगते थे, अब इस पुल के जरिए गुवाहाटी से उत्तर गुवाहाटी का सफर महज 7 मिनट में पूरा हो जाएगा.
चूंकि असम भूकंप प्रभावित क्षेत्र में आता है, इसलिए इस पुल को बनाने में अत्याधुनिक ‘बेस आइसोलेशन’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि बड़े भूकंप के झटके भी इसे नुकसान न पहुंचा सकें. इसमें ‘ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम’ भी लगाया गया है, जो किसी भी तरह की तकनीकी खराबी का तुरंत पता लगा लेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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