प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर दोनों देशों में चर्चा तेज हो गई है. करीब 11 साल बाद पीएम मोदी की कनाडा यात्रा होने की संभावना है. ऐसे में वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को भी इस दौरे का बेसब्री से इंतजार है. कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक का कहना है कि यह यात्रा भारत और कनाडा के रिश्तों को नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है.
पटनायक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बताया कि बीते एक साल में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करने के लिए लगातार काम किया है. राजनीतिक स्तर पर बातचीत बढ़ने के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कृषि, शिक्षा और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है.
उनके मुताबिक, अब दोनों देश ऐसे मुकाम पर पहुंच रहे हैं, जहां प्रधानमंत्री मोदी का कनाडा दौरा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का स्वाभाविक अगला कदम होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरी बार साल 2015 में कनाडा का दौरा किया था. इसके बाद अब उनकी प्रस्तावित यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
दिनेश के. पटनायक ने बताया कि भारत और कनाडा के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश पिछले साल उस समय तेज हुई, जब पीएम मोदी ने कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उन्हें इस सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया था.
इस दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों के उच्चायुक्तों को दोबारा जिम्मेदारी संभालने के लिए वापस भेजने पर सहमति जताई. इसके बाद सितंबर में दोनों उच्चायुक्तों ने अपना कार्यभार फिर से संभाल लिया.
पटनायक के अनुसार, इसके बाद से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय मुलाकातों और बातचीत का सिलसिला लगातार बढ़ा है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस साल फरवरी-मार्च में भारत का दौरा किया. वहीं, दोनों देशों के विदेश मंत्री पिछले एक साल में 12 से ज्यादा बार मिल चुके हैं.
रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन और शिक्षा जैसे विषयों पर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई है. हाल ही में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भारत यात्रा को भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है.
पीएम मोदी के संभावित दौरे के दौरान आर्थिक सहयोग पर भी खास ध्यान रहने की उम्मीद है. भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी सीईपीए को लेकर बातचीत चल रही है. इसके अब तक चार दौर पूरे हो चुके हैं.
पटनायक ने बताया कि इस समझौते पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. पिछले साल नवंबर में जोहान्सबर्ग में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान एक साल के भीतर वार्ता पूरी करने पर सहमति बनी थी.
भारतीय उच्चायुक्त को उम्मीद है कि नवंबर तक बातचीत पूरी हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि कोशिश है कि जब पीएम मोदी कनाडा पहुंचें, तब तक दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करने की स्थिति में हों.
अगर ऐसा होता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं. हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर होना अभी तय नहीं है और यह बातचीत पूरी होने पर निर्भर करेगा.
पटनायक ने कहा कि दोनों देश केवल व्यापार तक अपने रिश्तों को सीमित नहीं रखना चाहते. रक्षा, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, कृषि, खाद्य क्षेत्र, सुरक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे भी साझेदारी का हिस्सा हैं.
उन्होंने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और प्रधानमंत्रियों के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व के सहयोग से ही रिश्तों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है.
प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा को लेकर कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के बीच भी काफी उत्सुकता है. दिनेश के. पटनायक के मुताबिक, उन्हें लगातार संदेश मिल रहे हैं. लोग जानना चाहते हैं कि पीएम मोदी कनाडा कब आएंगे और उन्हें उनसे मिलने का मौका कैसे मिल सकता है.
कनाडा की 2021 की जनगणना के अनुसार, वहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी करीब 30 लाख है. इस समुदाय में अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल हैं. हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोगों के अलावा बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, शोधकर्ता, शिक्षक और कारोबारी भी कनाडा में रहते हैं.
पटनायक ने बताया कि इन सभी वर्गों के लोग प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जता रहे हैं. हालांकि, इतने बड़े समुदाय के हर व्यक्ति से मुलाकात कर पाना संभव नहीं होगा, लेकिन कोशिश रहेगी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस यात्रा से जुड़ने का अवसर मिले.
करीब एक दशक से ज्यादा समय बाद होने वाली इस यात्रा को लेकर भारतीय समुदाय की दिलचस्पी इस बात की ओर भी इशारा करती है कि दोनों देशों के रिश्तों में लोगों के बीच संपर्क की अहम भूमिका है.
भारत और कनाडा के संबंधों में सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय अपराध और प्रत्यर्पण जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिशों को अहम माना जा रहा है.
पटनायक ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बातचीत और तालमेल बढ़ा है. सीमापार अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों पक्ष मिलकर काम कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि पिछले साल सितंबर में कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भारत आई थीं और उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ बातचीत की थी. इसके बाद अजीत डोभाल ने भी फरवरी में कनाडा का दौरा किया.
भारतीय उच्चायुक्त के अनुसार, दोनों देशों के बीच अब इस बात को लेकर बेहतर समझ बन रही है कि कुछ सुरक्षा चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं. कनाडा में होने वाली कुछ आपराधिक गतिविधियां भारत के लिए भी चिंता का विषय बन सकती हैं, जबकि दूसरी ओर इनका असर कनाडा की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कनाडा के प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार डेविड मॉरिसन के बीच हुई हालिया बातचीत को भी पटनायक ने महत्वपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र के बीच बेहतर तालमेल के बिना द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा. पिछले एक साल में दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ाने और एक-दूसरे की चिंताओं को समझने की दिशा में काम हुआ है.
भारत और कनाडा की संबंधित एजेंसियां कई मुद्दों पर सहयोग कर रही हैं. इनमें रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी), भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और दूसरी संबंधित संस्थाएं शामिल हैं.
इस सहयोग का दायरा केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं है. आव्रजन से जुड़े मामले, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली, संगठित अपराध, धनशोधन और साइबर सुरक्षा जैसे विषय भी इसमें शामिल हैं.
पटनायक के मुताबिक, सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पहले दोनों देशों के संबंधों में तनाव की बड़ी वजह रहे हैं. अब बातचीत और आपसी सहयोग के जरिए इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है.
दिनेश के. पटनायक को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित कनाडा यात्रा तक दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर आगे की प्रगति देखने को मिलेगी. व्यापार समझौते से लेकर सुरक्षा सहयोग तक, दोनों पक्ष अपने रिश्तों को व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
फिलहाल, इस दौरे की अहमियत केवल प्रधानमंत्री की यात्रा तक सीमित नहीं है. इसके जरिए भारत और कनाडा के बीच आर्थिक साझेदारी, सुरक्षा संबंधों और लोगों के आपसी संपर्क को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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