Census 2027 India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अप्रैल 2026 को जनगणना 2027 के लिए अपनी स्व-गणना पूरी कर ली. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की. पीएम मोदी ने कहा कि आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है. यह चरण मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी जानकारी जुटाने का है.
यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना है. पहले यह काम कागज पर होता था. अब डेटा मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जुटाया जाएगा. इससे प्रक्रिया तेज, सटीक और पारदर्शी होगी. डेटा उसी साल उपलब्ध होने की उम्मीद है. यह जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दो चरणों में होगी.
पहली बार स्व-गणना की सुविधा शुरू की गई है. नागरिक 15 दिनों की अवधि में खुद अपने घर-परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं. इसके लिए se.census.gov.in पोर्टल बनाया गया है. मोबाइल नंबर से लॉगिन करके घर का विवरण भरना होता है. सबमिट करने पर यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (SE ID) मिलती है. बाद में गणक को यह आईडी दिखानी होगी.
पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध है. इसमें अंग्रेजी, हिंदी और 14 क्षेत्रीय भाषाएं शामिल हैं. कोई भी परिवार का सदस्य 15-20 मिनट में जानकारी भर सकता है. इसमें दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है. डेटा सुरक्षा के लिए कड़े उपाय किए गए हैं. डेटा सेंटरों को महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना घोषित किया गया है. जानकारी केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगी.
पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO) है. इसमें 33 प्रश्न पूछे जाएंगे. ये आवास की स्थिति, सुविधाएं, संपत्ति और घरेलू विवरण से जुड़े हैं. यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा. पहले 15 दिन स्व-गणना के लिए हैं. उसके बाद गणक घर-घर जाकर काम करेंगे. कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू हो गई है.
दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का होगा. इसमें उम्र, शिक्षा, व्यवसाय, प्रवास, प्रजनन आदि की जानकारी ली जाएगी. जाति गणना से जुड़े प्रश्न भी दूसरे चरण में अधिसूचित किए जाएंगे. यह स्वतंत्रता के बाद भारत की आठवीं और कुल 16वीं जनगणना है. 2011 के बाद 15 साल बाद यह हो रही है.
पीएम मोदी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-गणना जरूर करें. इससे गलतियां कम होंगी और भागीदारी बढ़ेगी. गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी स्व-गणना में भाग लिया. अधिकारियों ने कहा कि यह डिजिटल कदम विकास योजनाओं के लिए सही डेटा देगा.
जनगणना क्यों जरूरी
जनगणना से सरकार को विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण योजनाओं के लिए आधार मिलता है. डिजिटल मोड से डेटा जल्दी तैयार होगा. इससे नीतियां बेहतर बनेगी. कुल बजट 11,718 करोड़ रुपये का है.
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