प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे का आज दूसरा दिन है और सुबह की शुरुआत बेहद आध्यात्मिक और गौरवमयी रही. रविवार की सुबह सोमनाथ की धरती एक अलग ही ऊर्जा से भरी दिखी, जब पीएम मोदी महमूद गजनी के आक्रमण की 1000वीं बरसी पर आयोजित ‘शौर्य यात्रा’ के साक्षी बने. यह आयोजन महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की उस अटूट आस्था का जश्न है जिसे इतिहास में कई बार मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन वह हर बार और भव्य होकर उभरा.
108 घोड़ों के साथ निकली शौर्य यात्रा
रविवार सुबह जब सोमनाथ की सड़कों पर 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकला, तो नजारा देखने लायक था. पीएम मोदी इस शौर्य यात्रा में शामिल हुए और उन वीर योद्धाओं को नमन किया जिन्होंने सदियों पहले मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. इसके बाद प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के गर्भगृह में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की. सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष होने के नाते पीएम मोदी का इस मंदिर से गहरा लगाव रहा है, जो आज उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था.
आस्था की जीत का 1000वां साल
इस बार का ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ बेहद खास है. इतिहास के पन्ने पलटें तो साल 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने इस मंदिर को तहस-नहस कर दिया था. आज उस काले अध्याय के 1000 साल पूरे होने पर देश यह संदेश दे रहा है कि सोमनाथ हमारी सभ्यता के साहस का प्रतीक है. शनिवार शाम को भी पीएम मोदी ने यहां महाआरती की थी और 3000 ड्रोन्स के जरिए आसमान में सोमनाथ की गाथा को उकेरा गया था. ड्रोन शो में अहिल्याबाई होल्कर से लेकर सरदार पटेल तक के योगदान को दिखाया गया, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं.
आस्था के साथ विकास की रफ्तार
पीएम मोदी का आज का शेड्यूल सिर्फ भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गुजरात के विकास का ‘ब्लूप्रिंट’ भी शामिल है. सोमनाथ में सभा को संबोधित करने के बाद पीएम सीधे राजकोट के लिए रवाना होंगे. वहां वे एक बड़े ट्रेड शो और मारवाड़ी यूनिवर्सिटी के कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे. राजकोट को सौराष्ट्र का हब माना जाता है, ऐसे में पीएम का वहां जाना व्यापारिक दृष्टि से काफी अहम है.
दिन का अंत अहमदाबाद में एक बड़ी सौगात के साथ होगा. शाम सवा पांच बजे के करीब पीएम मोदी अहमदाबाद मेट्रो फेज-2 के बचे हुए हिस्से को हरी झंडी दिखाएंगे. यह मेट्रो प्रोजेक्ट राजधानी गांधीनगर और अहमदाबाद के बीच की दूरी को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा.
स्वाभिमान पर्व
इतिहास गवाह है कि सोमनाथ मंदिर पर गजनी से लेकर औरंगजेब तक ने कई बार हमले किए. लेकिन हर हमले के बाद किसी न किसी महापुरुष ने इसे फिर से खड़ा किया. चाहे वो राजा भीमदेव हों, रानी अहिल्याबाई हों या फिर आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल. आज पीएम मोदी ने उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए इसे ‘स्वाभिमान पर्व’ का नाम दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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