प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए भारत के टेलीकॉम और डिजिटल सफर की तस्वीर सामने रखी. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से ज्यादा समय में मोबाइल फोन की भूमिका तेजी से बदली है. कभी सिर्फ कॉल और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल आज पढ़ाई, इलाज, सरकारी सेवाओं, कारोबार और मनोरंजन तक लोगों की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है.
पीएम मोदी के मुताबिक, पिछले 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन केवल कम्युनिकेशन का जरिया नहीं रहा, बल्कि गुड गवर्नेंस का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव डिजिटल इंडिया के विजन के केंद्र में रहा है.
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि करीब एक दशक पहले भारत में डिजिटल डिवाइड एक बड़ी चुनौती थी. आधुनिक तकनीक तक पहुंच हर किसी की नहीं थी और कई लोगों के लिए इंटरनेट और डिजिटल सुविधाएं किसी खास वर्ग की चीज लगने लगी थीं.
डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए इस स्थिति को बदलने की कोशिश की गई. इसमें मोबाइल फोन और इंटरनेट को आम लोगों तक पहुंचाने पर खास जोर दिया गया. पीएम मोदी ने कहा कि इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं में भी देखने को मिला है.
आज देश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बच्चे भी ऑनलाइन पढ़ाई और दूसरी डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. इंटरनेट कनेक्टिविटी ने उन जगहों तक भी जानकारी पहुंचाई है, जहां पहले इसके लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी.
मोबाइल फोन ने आम लोगों के लिए सरकारी कामकाज को भी काफी हद तक आसान किया है. पीएम मोदी ने कहा कि आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल के जरिए उपलब्ध हैं. कई योजनाओं का पैसा भी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है.
उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं. उनके मुताबिक, इस व्यवस्था से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की व्यवस्था में इस तरह के भुगतान में लीकेज की गुंजाइश ज्यादा थी, लेकिन डिजिटल सिस्टम ने इस समस्या को काफी हद तक कम किया है.
पिछले वर्षों में देश के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में भी लगातार विस्तार हुआ है. दूर-दराज के इलाकों में मोबाइल टावर लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार किया गया और डेटा की कीमतों में भी कमी आई.
इसका असर सिर्फ फोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या पर नहीं पड़ा, बल्कि इससे कई नए सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़े. टेक्नोलॉजी, एजुकेशन और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में नए यूजर सामने आए तो दूसरी तरफ कंटेंट बनाने वालों और नए कारोबार शुरू करने वालों की संख्या भी बढ़ी.
पीएम मोदी ने गेमिंग इंडस्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में 50 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग से जुड़े हैं. इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों के युवा भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
अब मोबाइल पर गेम खेलना ही सब कुछ नहीं है. युवा ई-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं, गेमिंग से जुड़ा कंटेंट बना रहे हैं और अपने गेमिंग बिजनेस भी शुरू कर रहे हैं. यानी मोबाइल फोन मनोरंजन के साथ-साथ कमाई और क्रिएटिविटी का प्लेटफॉर्म भी बनता जा रहा है.
पीएम मोदी ने डिजिटल विस्तार के साथ साइबर और नेटवर्क सुरक्षा को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी में ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है, वैसे-वैसे फोन और नेटवर्क की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी हो गई है.
उन्होंने डीपफेक जैसी तकनीक से पैदा हो रही चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि इससे निपटने के लिए दुनिया को मिलकर एक ग्लोबल फ्रेमवर्क पर काम करने की जरूरत है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सिर्फ तकनीक इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर से आगे बढ़कर क्रिएटर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है. अब लक्ष्य यह है कि भारत में बनने वाले प्रोडक्ट के साथ-साथ उसका डिजाइन, टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा यानी आईपी भी भारत की हो.
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-भारत एक्सप्रेस
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