प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी में हिस्सा लेने के इच्छुक लोगों के लिए अच्छी खबर है. नीलामी की समय सीमा बढ़ा दी गई है. अब लोग 31 अक्टूबर तक इन स्मृति चिह्नों के लिए बोली लगा सकेंगे. पहले यह प्रक्रिया 2 अक्टूबर को खत्म होनी थी.
यह ई-नीलामी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर शुरू हुई थी. इस बार नीलामी में कुल 30 स्मृति चिह्न रखे गए हैं. इनमें मूर्तियों और कलाकृतियों से लेकर अलग-अलग संस्थानों और खेलों से जुड़ी यादगार वस्तुएं शामिल हैं.
इस बार के संग्रह में अलग-अलग तरह की चीजें देखने को मिलती हैं. इनमें नौ फोटो फ्रेम, नौ अन्य स्मृति चिह्न और छह मूर्तियां व प्रतिमाएं शामिल हैं. इसके अलावा दिल्ली मेट्रो के दो मॉडल, खेल से जुड़ी एक यादगार वस्तु, एक पेंटिंग और कला एवं हस्तशिल्प से तैयार कई वस्तुएं भी नीलामी का हिस्सा हैं.
इन स्मृति चिह्नों में दिल्ली की पहचान और विरासत की झलक भी दिखाई देती है. राजधानी की ऐतिहासिक और संस्थागत पहचान को दर्शाने वाली कई कलाकृतियां इसमें शामिल की गई हैं.
नीलामी के संग्रह में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी वस्तुओं को भी जगह मिली है. भगवान राम और रामायण से जुड़े चार स्मृति चिह्न खास तौर पर शामिल हैं. इनमें राम दरबार की मूर्ति, भगवान राम को केवट के साथ नदी पार करते हुए दिखाने वाली कलाकृति और माता सीता व लक्ष्मण को दर्शाती पीतल की पट्टिका शामिल है.
इसके अलावा पालम गांव के संत दादा देव की पेंटिंग और लकड़ी से तैयार रामलला की नक्काशीदार प्रतिमा भी संग्रह का हिस्सा है.
बौद्ध परंपरा से जुड़ी एक खास कलाकृति भी यहां मौजूद है. इसमें बौद्ध धर्म के आठ शुभ प्रतीकों को दर्शाया गया है, जिन्हें ‘अष्टमंगल के आठ शुभ प्रतीक’ कहा जाता है. बौद्ध परंपरा में इन प्रतीकों को आध्यात्मिक महत्व हासिल है और इन्हें भगवान बुद्ध की शिक्षाओं तथा ज्ञान प्राप्ति से जोड़ा जाता है.
इस बार की नीलामी में राजधानी दिल्ली के प्रमुख संस्थानों और इमारतों की झलक देने वाली कलाकृतियां भी रखी गई हैं. एक फ्रेम वाली कलाकृति में सेंट स्टीफंस कॉलेज को दर्शाया गया है. वहीं पुराने सचिवालय भवन से जुड़ा क्रिस्टल स्मृति चिह्न और नए संसद भवन को दर्शाने वाली कपड़े पर बनी कलाकृति भी संग्रह में शामिल है.
यानी इन स्मृति चिह्नों में सिर्फ किसी खास मौके की याद नहीं, बल्कि दिल्ली के इतिहास और सार्वजनिक संस्थानों की पहचान भी दिखाई देती है.
संग्रह में व्यक्तिगत कला, सार्वजनिक सेवा और देश की उपलब्धियों से जुड़े स्मृति चिह्न भी हैं. रोहिणी के एक छात्र द्वारा पेंसिल से बनाई गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारीक तस्वीर इनमें शामिल है.
वहीं पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाले डिस्कस थ्रोअर योगेश कथुनिया का डिस्कस भी नीलामी के लिए रखा गया है. यह खेल उपलब्धि और मेहनत की कहानी से जुड़ा स्मृति चिह्न है.
इसके अलावा एनसीसी का सोने की पॉलिश वाला ‘परम वीर माटी कलश’ भी इस संग्रह में शामिल है. प्राकृतिक बोधि पत्ते पर बारीकी से तैयार की गई एक कलाकृति भी लोगों के लिए उपलब्ध है.
इन स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी से मिलने वाली राशि ‘नमामि गंगे परियोजना’ के लिए दी जाएगी. यानी नीलामी में हिस्सा लेने वाले लोग इन वस्तुओं को यादगार के तौर पर अपने पास रखने के साथ इस परियोजना में योगदान भी कर सकेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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