Shyamji Krishna Varma death anniversary: 30 मार्च 2026 को महान क्रांतिकारी और विद्वान श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है. प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्हें ‘भारत माता का वीर सपूत’ बताते हुए कहा कि उनके क्रांतिकारी विचारों ने आजादी के आंदोलन में एक नई चेतना का संचार किया था.
पीएम मोदी ने एक विशिष्ट ‘संस्कृत सुभाषितम्’ के माध्यम से उनके साहस को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि उज्ज्वल यश केवल साहस धारण करने से ही प्राप्त होता है. उल्लेखनीय है कि श्यामजी कृष्ण वर्मा वही शख्सियत हैं जिनकी अस्थियों को दशकों बाद प्रधानमंत्री मोदी खुद स्विट्जरलैंड से भारत लेकर आए थे, जो उनके प्रति पीएम के गहरे सम्मान को दर्शाता है.
श्यामजी कृष्ण वर्मा केवल एक सेनानी नहीं बल्कि एक उच्च कोटि के वकील और पत्रकार भी थे. उन्होंने लंदन में ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना की थी, जो सावरकर, लाला हरदयाल और मदनलाल ढींगरा जैसे क्रांतिकारियों के लिए वैचारिक खाद-पानी का केंद्र बना. कहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और दिल्ली के नेताओं ने उनके इसी योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी धरती पर रहकर भी भारत की आजादी की मशाल को कभी बुझने नहीं दिया. ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ पत्रिका के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश दमन के खिलाफ विश्व जनमत तैयार किया, जिससे उनकी अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रमाण मिलता है.
इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने श्यामजी कृष्ण वर्मा के जीवन को अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रतीक करार दिया. वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने उनके त्याग और समर्पण को भावी पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताया.
वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विशेष रूप से ‘इंडिया हाउस’ की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि क्रांतिकारियों को संगठित करने में श्यामजी की भूमिका अतुलनीय थी. देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में आज उनके उस अदम्य साहस को याद किया जा रहा है, जिसने उस दौर के युवाओं में स्वदेश के प्रति कर्तव्यों की भावना भरी थी.
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषित “प्राप्यते किं यशः शुभ्रमनङ्गीकृत्य साहसम्” आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है. इसका अर्थ है कि विलक्षण कार्यों से मिलने वाला उज्ज्वल यश बिना साहस के प्राप्त नहीं किया जा सकता. श्यामजी कृष्ण वर्मा का जीवन इसी साहस की जीती-जागती मिसाल था, जिन्होंने उस दौर में अंग्रेजों को उनके ही घर में चुनौती दी थी. आज उनकी पुण्यतिथि पर देश न केवल उन्हें याद कर रहा है बल्कि उनके उन आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प भी ले रहा है जो राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करते हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Tamil Nadu Jail Break news: तमिलनाडु के थेनी जिले में जेल से 17 कैदियों के…
निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी! जियो प्लेटफॉर्म्स के मेगा आईपीओ में शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल…
Gold Silver Rate Today 27 October: 27 अक्टूबर को सर्राफा बाजार में सोने की कीमत…
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की 28 सीटों के चुनाव परिणामों…
Vijay Rashmika Fake Social Media Posts: विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की ‘विरोश’ टीम ने…
'बिग बॉस 20' के घर में ड्रामा रुकने का नाम नहीं ले रहा है. वीकेंड…