PM Modi On Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात के विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे. यह यात्रा कोई सामान्य दर्शन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक घटना का साक्षी बनने जा रही है. पीएम मोदी ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में हिस्सा लेंगे, जो मंदिर पर 1026 में हुए महमूद गजनवी के पहले बड़े हमले के 1000 साल पूरे होने की याद में आयोजित किया जा रहा है. 8 जनवरी से 11 जनवरी तक चलने वाले इस चार दिवसीय आयोजन में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की एक श्रृंखला चलेगी, जिसकी शुरुआत खुद पीएम मोदी करेंगे.
अपनी यात्रा से पूर्व पीएम मोदी ने एक भावुक ब्लॉग लिखकर सोमनाथ के संघर्ष को ‘भारत की आत्मा की शाश्वत घोषणा’ बताया है. उन्होंने लिखा कि नफरत विनाश कर सकती है, लेकिन आस्था फिर से सृजन करती है. यह वर्ष इसलिए भी खास है क्योंकि एक तरफ गजनवी के हमले के 1000 साल पूरे हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं.
सोमनाथ मंदिर का इतिहास बार-बार टूटने और फिर से खड़े होने की एक अद्भुत कहानी है. 1026 में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर भीषण आक्रमण किया था. यह मानव इतिहास की बड़ी त्रासदियों में से एक थी. हालांकि, मंदिर हर बार राख से उठ खड़ा हुआ. स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और 1951 में यह मंदिर अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में आकार ले सका. वर्ष 2026 इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि यह हमले की 1000वीं बरसी और पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ का संगम है.
जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह से दूरी बना ली थी. उनका मानना था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को धार्मिक आयोजनों से दूर रहना चाहिए. उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी वहां न जाने की सलाह दी थी और इसे ‘सरकारी आयोजन’ मानने से इनकार कर दिया था. इसके ठीक विपरीत, पीएम मोदी जनवरी 2021 से श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन हैं और मंदिर के विकास कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े हैं. मोरारजी देसाई के बाद वे दूसरे ऐसे पीएम हैं जो ट्रस्ट के चेयरमैन बने हैं.
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11 जनवरी को पीएम मोदी की सोमनाथ यात्रा अतीत के जख्मों और वर्तमान के गौरव का मिलन है. जहां 1000 साल पहले गजनवी ने विध्वंस किया था, वहीं आज भारत ‘स्वाभिमान पर्व’ मनाकर अपनी अटूट आस्था का परिचय दे रहा है. नेहरू के दौर की ‘दूरी’ से लेकर मोदी के दौर की ‘सक्रियता’ तक, सोमनाथ मंदिर ने भारतीय राजनीति और समाज में आए बदलावों को बहुत करीब से देखा है. यह यात्रा न केवल आस्था का उत्सव है, बल्कि ‘नया भारत’ के आत्मविश्वास की हुंकार भी है.
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