प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) हर सुबह सोशल मीडिया पर एक संस्कृत ‘सुभाषितम्’ श्लोक साझा करते हैं. यह श्लोक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी और जीवन मूल्यों को गहराई से प्रभावित करते हैं. आज का श्लोक रिश्तों, ज्ञान और आपसी सम्मान के महत्व को बहुत ही खूबसूरत तरीके से समझाता है. आइए जानते हैं कि पीएम मोदी द्वारा शेयर किए गए इस श्लोक का क्या अर्थ है और यह हमारी जिंदगी में क्या संदेश देता है.
आज का श्लोक कुछ इस प्रकार है:
ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥
ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥ pic.twitter.com/JoTDKpmwnM
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
इस बेहद गहरे श्लोक का सीधा सा मतलब यह है कि जो लोग उम्र या अनुभव से बड़े होते हैं, वे हमेशा दूसरों की बात सुनने, सीखने और एक-दूसरे का सम्मान करने की भावना रखते हैं. जब लोग बिना किसी स्वार्थ या छुपे हुए मकसद के आपस में जुड़ते हैं और एक-दूसरे का आदर करते हैं, तो वे जीवन के हर पहलू में सच्चे सुख और आनंद का अनुभव करते हैं.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां हर कोई आगे निकलने की होड़ में है यह श्लोक हमें रुककर सोचना सिखाता है. अगर हम अपनों की सुनें, बड़ों का सम्मान करें और बिना किसी स्वार्थ के रिश्ते निभाएं, तो मन की शांति और असली खुशी खुद मिल जाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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