पीएम ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को पत्र लिखा है. पीएम मोदी ने ‘एबार भाजपा सरकार’ का नारा देते हुए ममता बनर्जी को घेरा है. पीएम ने लिखा है कि सोनार बंगाल का सपना देखने वाला हर व्यक्ति दुखी है. पश्चिम बंगाल में माताएं-बहनें आज सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं. पीएम मोदी ने पत्र में लिखा है-
जय मां काली…अब बस कुछ ही महीने में पश्चिम बंगाल का भाग्य सुनिश्चित हो जाएगा. आने वाली पीढ़ी का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह आपके सोचे-समझे फैसले पर निर्भर करता है. मेरे सोनार बंगाल के सपने देखने वाला हर एक जवान, बूढ़ा और महिला आज बहुत पीड़ा में हैं. उनकी पीड़ा से आज मेरा हृदय भी व्यथित है. इसलिए, मैंने मन की गहराइयों से एक संकल्प लिया है, पश्चिम बंगाल को ‘विकसित’ और समृद्ध बनाने का संकल्प.
अपने पत्र में आगे पीएम मोदी ने लिखा कि पिछले 11 वर्षों में देशवासियों के आशीर्वाद को ताकत बनाकर मेरी सरकार ने जनकल्याण और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. किसानों के कल्याण से लेकर युवाओं के सपनों को साकार करने तक, और मातृशक्ति के सशक्तीकरण से लेकर समाज के हर वर्ग तक, हमारी नीतियों और निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आज साफ दिखाई दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने आगे लिखा है कि राज्य सरकार के असहयोग और विरोध के बावजूद, आज पश्चिम बंगाल के करीब 5 करोड़ लोग ‘जन-धन योजना’ के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं. ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत राज्य में 85 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है. जब राज्य की सत्ताधारी पार्टी गरीबों का निवाला छीन रही है, तब हमने छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को 2.82 लाख करोड़ रुपये का लोन देकर मदद का हाथ बढ़ाया है. ‘अटल पेंशन योजना’ के तहत 56 लाख वरिष्ठ नागरिकों को बुढ़ापे में आत्मनिर्भर बनाने का सौभाग्य मुझे मिला है.
‘उज्ज्वला योजना’ के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक परिवारों को रसोई गैस देकर माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाकर मैं धन्य हूं. जो किसान पूरे देश का पेट भरते हैं, आज पश्चिम बंगाल में वही अन्नदाता अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसी कठिन परिस्थिति में ‘किसान सम्मान निधि’ के जरिए 52 लाख से अधिक किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाकर, मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं.
पीएम मोदी ने लिखा कि स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करता था और औद्योगिक विकास में अग्रणी था. लेकिन आज इस गौरवशाली राज्य की जर्जर हालत देखकर मेरा मन व्यथित हो उठता है. पिछले छह दशकों के कुशासन और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण पश्चिम बंगाल को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसे बयान नहीं किया जा सकता. एक तरफ, रोजगार के अभाव में युवा दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में मेरी माताएं और बहनें आज सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं.
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स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरविंद ने जिस बंगाल का सपना देखा था, वह आज वोट-बैंक की संकीर्ण राजनीति, हिंसा और अराजकता में जकड़ा हुआ है और यह हम सबके लिए अत्यंत पीड़ादायक है. पश्चिम बंगाल की धरती के सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘आजादी के ललकार’ ने कभी पूरे देश को प्रेरित किया था, पर आज उनकी ही पवित्र भूमि अवैध घुसपैठ और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से कलंकित है. कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का सोनार बंगाल पर नकली वोटर हावी हो रहे हैं. अराजकता के अंधेरे में डूबते पश्चिम बंगाल को देखकर आज पूरा देश चिंतित है.”
उन्होंने लिखा कि लेकिन कब तक हम चुपचाप यह सब सहते रहेंगे? अब परिवर्तन अनिवार्य है. देश के कई राज्यों में आज जीवन स्तर बेहतर हुआ है, गरीबों के चेहरे पर मुस्कान आई है. ‘आयुष्मान भारत’ से स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है, युवाओं को रोजगार मिला है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है. पश्चिम बंगाल भी इस विकास और प्रगति का पूरा हकदार है.
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