Prashant Kishor Poster Controversy: बिहार (Bihar) के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur By-Election) में सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंच गया है. राजनीति के नए ‘चाणक्य’ और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. लेकिन चुनाव से ऐन पहले पीके की ‘जन सुराज’ (Jan Suraaj) पार्टी में एक बड़ी टूट हो गई है. उनके बेहद करीबी और प्रसिद्ध गणितज्ञ प्रोफेसर के.सी. सिन्हा (KC Sinha) समेत कई दिग्गज नेता जन सुराज छोड़कर बीजेपी (BJP) में शामिल हो गए हैं. इस टूट के साथ ही पटना की सड़कों पर प्रशांत किशोर के खिलाफ एक बेहद आक्रामक ‘पोस्टर वार’ छिड़ गया है.
गुरुवार की सुबह पटना के लोगों ने सड़कों पर कुछ ऐसे पोस्टर देखे, जिन्होंने पूरे सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया. इन पोस्टरों में प्रशांत किशोर को मुस्लिम टोपी पहने और गले में गमछा डाले दिखाया गया है. सबसे ज्यादा विवाद उस तस्वीर को लेकर है जिसमें पीके के हाथ में नोटों की गड्डी दिखाई गई है.
पोस्टर में ‘जन सुराज’ का मजाक उड़ाते हुए उसे ‘धन सुराज’ लिखा गया है और ऊपर एक बड़ा स्लोगन है- “वोट नहीं नोट चाहिए.” नीचे साफ-साफ धमकी भरे लहजे में लिखा है- “के.सी. सिन्हा तो झांकी है, जमानत जब्त होना अभी बाकी है.”
प्रशांत किशोर के लिए सबसे बड़ा झटका यह है कि ये पोस्टर तब लगे हैं, जब कुम्हरार से उनके उम्मीदवार रहे केसी सिन्हा और रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह जैसे करीबी नेताओं ने अचानक बीजेपी का दामन थाम लिया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इन सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाई है. इसके अलावा मनेर से जन सुराज के उम्मीदवार रहे गोपाल सिंह और किसान मोर्चा के अध्यक्ष ब्रज किशोर सिन्हा भी ‘कमल’ थाम चुके हैं.
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हालांकि, चुनाव आचार संहिता (Election Code of Conduct) का हवाला देते हुए नगर निगम ने इन विवादित पोस्टरों को तुरंत हटा दिया है. इन पोस्टरों के नीचे आयोजक के तौर पर सिर्फ “सौजन्य: बांकीपुर की जनता” लिखा है, लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि यह प्रशांत किशोर की एक बड़ी और सोची-समझी घेराबंदी का हिस्सा है. बांकीपुर में पीके का सीधा मुकाबला बीजेपी के नीरज सिन्हा (Neeraj Sinha) से है, जिनके लिए बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों की फौज उतार दी है. अब देखना यह है कि अपनों की बगावत और इस तीखे पोस्टर वार का पीके क्या जवाब देते हैं.
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