PM Modi In Raisina Dialogue 2026: पीएम मोदी ने गुरुवार शाम भारत के प्रतिष्ठित भू-राजनीतिक मंच ‘रायसीना डायलॉग’ के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया. 110 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने वैश्विक संघर्षों की ओर इशारा करते हुए एक बेहद गंभीर संदेश दिया. उन्होंने साफ कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जिस अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, उससे निपटने के लिए भारत और यूरोप जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों का एक साथ आना समय की मांग है.
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, “आज दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता के मुहाने पर खड़ी है. यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया (इजरायल-ईरान युद्ध) तक संघर्ष बना हुआ है.” प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पूरा मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर बैठा है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि इन संघर्षों का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है.
पीएम मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्जेंडर स्टब की मौजूदगी में भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सामरिक महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, “हम भारत-यूरोप संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रहे हैं. भारत और फिनलैंड का सहयोग आज की बदलती दुनिया को मजबूती दे रहा है.”
इससे पहले, हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और राष्ट्रपति स्टब के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया. पीएम ने राष्ट्रपति स्टब का स्वागत करते हुए कहा कि उनके जैसे विजनरी लीडर का रायसीना डायलॉग में चीफ गेस्ट बनना भारत के लिए सम्मान की बात है.
इस साल रायसीना डायलॉग की थीम ‘संस्कार – दावा, समायोजन, उन्नति’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विवादों के बीच भी किस तरह तालमेल (Accommodation) बिठाकर आगे बढ़ा जा सकता है, भारत इसका उदाहरण पेश कर रहा है. उन्होंने विश्वास जताया कि यह तीन दिवसीय मंथन ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और वैश्विक शांति के लिए नए रास्ते खोलेगा.
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पीएम के इस संबोधन ने रायसीना डायलॉग के मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच एक स्थिर शक्ति के रूप में खड़ा है. फिनलैंड के साथ हुए समझौते और यूरोप के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय विमर्श (Narrative) तय करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है.
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