Rajasthan Rajya Sabha election 2026: जयपुर/राजीव तिवारी: राजस्थान की सियासत का पारा एक बार फिर उफान पर है. जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर जयपुर से लेकर दिल्ली तक हलचल और गुप्त बैठकों का दौर तेज हो गया है. कांग्रेस सांसद नीरज डांगी, बीजेपी सांसद राजेंद्र गहलोत और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल पूरा हो रहा है. विधानसभा के संख्या बल को देखें तो 3 में से 1 सीट कांग्रेस और 2 सीटें बीजेपी के खाते में पक्की मानी जा रही हैं.
अब सबसे बड़ा और ‘मिलियन डॉलर’ सवाल यह है कि आखिर बीजेपी इस बार राजस्थान से किन दो चेहरों को ‘दिल्ली दरबार’ (राज्यसभा) भेजेगी? इसमें भी एक नाम तो करीब-करीब तय है. अब BJP के पास बचे एक सीट को लेकर माथापच्ची हो रही है.
बीजेपी आलाकमान के सामने चुनौती सिर्फ 2 उम्मीदवार तय करने की नहीं है. पार्टी एक ऐसा बड़ा राजनीतिक और सामाजिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेलना चाहती है, जिसका सीधा असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर पड़े. सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व इस बार जातीय समीकरण, संगठनात्मक अनुभव और चुनावी प्रभाव की कसौटी पर ही उम्मीदवारों का फाइनल सिलेक्शन करेगा.
बीजेपी की तरफ से सबसे मजबूत और पहला नाम केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का माना जा रहा है. केंद्र सरकार में उनकी अहम भूमिका और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी उपयोगिता को देखते हुए पूरी संभावना है कि पार्टी उन पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा में रिपीट कर दे.
असली पेंच दूसरी सीट पर फंसा है, जहां राजस्थान बीजेपी के कई दिग्गज अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
राजेंद्र राठौड़: राजस्थान बीजेपी के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक. 7 बार विधायक रहे राठौड़ का संगठन और सरकार, दोनों में तगड़ा अनुभव है. हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका को दिल्ली आलाकमान बेहद ‘सकारात्मक’ नजरिए से देख रहा है.
सतीश पूनिया: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का नाम भी रेस में काफी आगे है. संगठन में लंबे समय तक पसीना बहाने और फिलहाल हरियाणा बीजेपी के प्रभारी होने के नाते पार्टी में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है.
अलका गुर्जर: इसी बीच ‘सरप्राइज पैकेज’ के तौर पर बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर का नाम भी तेजी से उभर रहा है. ‘ओबीसी महिला चेहरे’ के तौर पर उनकी पहचान और दिल्ली संगठन में उनकी सक्रियता उन्हें एक बेहद गंभीर दावेदार बनाती है.
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राजनीतिक जानकारों का साफ मानना है कि बीजेपी ऐसा चेहरा चुनेगी जो सिर्फ राज्यसभा की कुर्सी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाले चुनावों में विपक्ष को पछाड़ने के लिए एक बड़ा हथियार बने. राज्यसभा चुनाव की इस सरगर्मी के बीच प्रदेश सदस्य मदन राठौड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. अब बस इंतजार है तो ‘दिल्ली’ से आने वाली उस फाइनल लिस्ट का, जो किसी का राज्याभिषेक करेगी और किसी का पत्ता काटेगी.
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