गृहमंत्री अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि
देश के स्वतंत्रता आंदोलन में विदेश की धरती से भारत की आजादी की आवाज बुलंद करने वाले महान क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर देशभर में याद किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को नमन किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा ने भारत को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था.
श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी में हुआ था. वह केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि विद्वान, लेखक और पत्रकार भी थे. विदेश में रहते हुए उन्होंने भारत की आजादी के लिए ऐसा माहौल तैयार किया, जिसने उस दौर के कई युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया.
श्यामजी कृष्ण वर्मा के नाम से सबसे अहम जुड़ी उपलब्धियों में लंदन स्थित ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना शामिल है. यह उस समय भारतीय राष्ट्रवादियों और स्वतंत्रता समर्थकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था. उन्होंने ‘इंडियन होम रूल सोसाइटी’ की भी स्थापना की और ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ पत्रिका के जरिए ब्रिटिश शासन की नीतियों पर सवाल उठाए.
विदेश में रहने वाले भारतीयों को आजादी के लिये प्रेरित करने वाले महान क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
लंदन में ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना कर उन्होंने अंग्रेजों की धरती से स्वाधीनता की ऐसी ज्योति जलाई, जिससे क्रांतिकारियों की एक नई पौध तैयार हुई।
‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ पत्रिका व ‘इंडियन होम रूल सोसाइटी’ के माध्यम से अंग्रेज़ों की दमनकारी नीतियों की मुखर आलोचना करने वाले श्यामजी कृष्ण वर्मा जी का संघर्ष व त्याग यह राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा।
— Amit Shah (@AmitShah) October 4, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए श्यामजी कृष्ण वर्मा ने जिस साहस और समर्पण का परिचय दिया, उसे देश कभी नहीं भूल सकता.
श्यामजी कृष्ण वर्मा के प्रयासों का असर आगे चलकर कई युवा राष्ट्रवादियों पर पड़ा. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वीर सावरकर, मदनलाल ढींगरा और लाला हरदयाल जैसे क्रांतिकारी उनके विचारों से प्रभावित थे. इस तरह विदेश में बैठकर भी उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक और संगठनात्मक आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उनका जीवन इस बात की मिसाल है कि आजादी की लड़ाई सिर्फ भारत की धरती तक सीमित नहीं थी. विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने भी अपने-अपने तरीके से इस आंदोलन को मजबूती दी. श्यामजी कृष्ण वर्मा का नाम इसी संघर्ष की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आज भी याद किया जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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