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सुप्रीम कोर्ट तय करेगा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुनवाई की तारीख

2023 में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई की तारीख तय करेगा. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई की तारीख के बारे में अदालत ने निर्णय लिया. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द की जाए, क्योंकि यह 140 करोड़ लोगों से जुड़ा हुआ एक अहम मामला है.

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर विवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं, विशेष रूप से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कानून के संदर्भ में, जो चयन समिति की संरचना में बदलाव करता है. इस नए कानून के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए बनाई गई समिति में अब कैबिनेट मंत्री को तीसरे सदस्य के रूप में रखा गया है, जबकि पहले यह समिति प्रधानमंत्री, विपक्षी नेता और मुख्य न्यायाधीश के साथ मिलकर चुनाव करती थी.

सुप्रीम कोर्ट से समाधान की उम्मीद

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उनका कहना है कि इस बदलाव से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बनी रह सकती है और यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हो सकता है. इसके अलावा, कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एडीआर ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. उनका कहना है कि यह नया कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्तों का चयन एक स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए.

केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यीय पैनल द्वारा की जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे. हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए इस चयन समिति में कैबिनेट मंत्री को शामिल किया है, जिससे इसे लेकर विवाद बढ़ गया है.

संविधानिक उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार के इस फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार दिया है. उनका कहना है कि इस फैसले से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा, जिससे लोकतंत्र में स्वतंत्रता और पारदर्शिता खतरे में पड़ सकती है. अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर निर्णय लेगा और तय करेगा कि इस पर कब सुनवाई होगी.

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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