Suvendu Adhikari new CM Bengal: पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर भाजपा ने सत्ता का शिखर छू लिया है, और इस ऐतिहासिक जीत के महानायक बनकर उभरे हैं सुवेंदु अधिकारी. आखिर क्या वजह रही कि दिलीप घोष, सुकांत मजूमदार और मिथुन चक्रवर्ती जैसे दिग्गजों की मौजूदगी के बावजूद सुवेंदु ही मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे निकल गए?
यहां समझिए सुवेंदु अधिकारी के ‘नंबर-1’ बनने के पीछे के 5 सबसे बड़े कारण और उनके भव्य शपथ ग्रहण का पूरा ब्योरा.
ममता बनर्जी के ‘अजेय’ होने का भ्रम तोड़ा: सुवेंदु अधिकारी बंगाल के इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्होंने ममता बनर्जी को लगातार दो बार हराया है. पहले नंदीग्राम और अब भवानीपुर में दीदी को पटखनी देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे अकेले ही ‘विपक्ष के टाइगर’ हैं.
टीएमसी की रग-रग से वाकिफ: वर्षों तक ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार रहने के कारण सुवेंदु टीएमसी की रणनीति, उसकी कमजोरी और बूथ लेवल की चुनावी इंजीनियरिंग को बखूबी समझते हैं. इसी अनुभव का फायदा बीजेपी को मिला.
जमीनी पकड़ और आक्रामक तेवर: सुवेंदु सिर्फ एयर-कंडीशन्ड कमरों के नेता नहीं हैं. उनकी कार्यकर्ताओं से सीधी कनेक्टिविटी है. हर संघर्ष और लाठीचार्ज में वे आगे रहे, जिससे पार्टी के भीतर उनकी ‘फ्रंटलाइन लीडर’ की छवि मजबूत हुई.
हिंदुत्व और स्थानीय मुद्दों का ‘परफेक्ट’ ब्लेंड: उन्होंने बंगाल के जटिल सामाजिक समीकरणों को समझा. एक तरफ उन्होंने हिंदुत्व के एजेंडे को धार दी, तो दूसरी तरफ स्थानीय बंगाली अस्मिता और स्वदेशी मुद्दों को जोड़कर एक ऐसा राजनीतिक संतुलन बनाया जिसका तोड़ विपक्ष के पास नहीं था.
मोदी-शाह का अटूट भरोसा: केंद्रीय नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ सुवेंदु का तालमेल सबसे शानदार रहा. दिल्ली को बंगाल में एक ऐसा चेहरा चाहिए था जो कड़े फैसले ले सके, और सुवेंदु उस कसौटी पर खरे उतरे.
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चूंकि शपथ ग्रहण रवींद्र जयंती पर हो रहा है, इसलिए समारोह को पूरी तरह बंगाली रंग में रंगा जा रहा है. रवींद्र संगीत और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति की झलक ब्रिगेड ग्राउंड में दिखाई देगी. भाजपा इसके जरिए यह संदेश देना चाहती है कि नई सरकार पूरी तरह ‘सोनार बांग्ला’ और बंगाली अस्मिता के प्रति समर्पित है.
वहीं खबर यह भी मिल रही है कि समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे दिग्गज मंच पर मौजूद रहेंगे. इसके अलावा एनडीए शासित 20 राज्यों के मुख्यमंत्री और देशभर की प्रमुख हस्तियां इस पल की गवाह बनेंगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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