बिहार की राजनीति और लालू परिवार के भीतर से इस वक्त की सबसे बड़ी सियासी खबर सामने आ रही है. नीट (NEET) पेपर लीक और 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार हुए जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) मंगलवार शाम को बेउर केंद्रीय कारा से रिहा हो गए.
जेल से बाहर आते ही उन्होंने किसी राजनीतिक मंच पर जाने के बजाय सीधे अपनी मां राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) से मुलाकात की, जिसने बिहार के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है.
जेल के बाहर तेज प्रताप के समर्थकों की भारी भीड़ जुटी थी और ‘तेज प्रताप जिंदाबाद’ के नारे लग रहे थे. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की प्रत्याशी वीणा मानवी ने उन्हें खीर खिलाकर रिहाई की खुशी मनाई. हालांकि, तेज प्रताप बेहद शांत और गंभीर नजर आए. वे बिना मीडिया से बात किए सीधे अपनी गाड़ी में बैठे और कौटिल्य नगर स्थित पारिवारिक आवास पहुंचे. वहां उन्होंने मां राबड़ी देवी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जहां तेजस्वी यादव पहले से मौजूद थे.
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आरजेडी (RJD) से निष्कासित किए जाने और अपनी नई पार्टी बनाने के बाद, पिछले दो महीनों में यह पहला मौका था जब तेज और तेजस्वी आमने-सामने बैठकर बात कर रहे थे. खुद को ‘कृष्ण’ और तेजस्वी को ‘अर्जुन’ बताने वाले तेज प्रताप की इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जेल यात्रा ने दोनों भाइयों के बीच की कड़वाहट को दूर करने का काम किया है. जब तेज प्रताप जेल गए थे, तब विदेश से लौटते ही तेजस्वी यादव बेहद गुस्से में आ गए थे. उन्होंने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार को सीधे चेतावनी दी थी कि अगर उनके भाई को रिहा नहीं किया गया, तो वे पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे. तेजस्वी के इस कड़े और सुरक्षात्मक रुख से दोनों भाइयों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती दिख रही है.
आपको बता दें कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज की गई 64 एफआईआर (FIR) वापस लेने के फैसले के बाद ही तेज प्रताप यादव की रिहाई का रास्ता साफ हुआ. हालांकि दोनों भाइयों के बीच कमरे के भीतर क्या बातचीत हुई, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है.
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इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि लालू परिवार में संवाद के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं. अब देखना यह होगा कि क्या यह मुलाकात सिर्फ पारिवारिक भावुकता थी या फिर बिहार चुनावों से पहले दोनों भाइयों के राजनीतिक रूप से एक होने का शंखनाद.
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