देश

भारत के हर बदलाव का आईना रही है मध्यवर्गीय आबादी, यहां, समझें कैसे आया साल-दर-साल परिवर्तन

भारत को समझना है तो उसकी मध्यवर्गीय (Middle Class) आबादी को समझना होगा. औपनिवेशिक अदालतों और चॉक के धूल से भरी कक्षाओं से लेकर मेट्रो स्टेशन, डिजी-लॉकर और क्यूआर कोड भुगतान तक- यह वर्ग राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के हर बदलाव का आईना रहा है. इसने राशन कार्ड के लिए कतार में खड़ा होकर इंतजार किया, जीएसटी पर बहस की, सोवियत शैली की फैक्ट्रियों में काम किया, उदारीकरण का स्वागत किया, सड़कों पर प्रदर्शन किए और स्टार्टअप शुरू किए. समाजशास्त्रियों सुरिंदर एस. जोधका और असीम प्रकाश ने एक शोध पत्र में इसकी यात्रा को कई “क्षणों” में बांटा है- ऐसे चरण, जो अपने समय की ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक धाराओं से आकार लेते हैं.

Middle Class तीन बार खुद दो नया रूप दे चुका

यह कहानी 1947 से शुरू नहीं होती, इसकी जड़ें ब्रिटिश राज तक जाती हैं, और तब से अब तक यह वर्ग (Middle Class) कम से कम तीन बार खुद को नया रूप दे चुका है. ब्रिटिश सिर्फ शासन ही नहीं लाए, बल्कि आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था, धर्मनिरपेक्ष शिक्षा और एक नौकरशाही तंत्र भी लेकर आए, जिसे नए प्रकार के कर्मचारियों की जरूरत थी. कलकत्ता, बंबई और मद्रास में स्कूल और कॉलेज तेजी से खुले.

आंकड़े बताते हैं- 1911 तक भारत में 186 कॉलेजों में 36,284 छात्र थे. 1921 तक कॉलेजों की संख्या 231 और छात्र 59,595 हो गए. 1939 तक यह बढ़कर 385 कॉलेज और 1,44,904 छात्र हो गए (बी.बी. मिश्रा की पुस्तक The Indian Middle Class के अनुसार). यहीं से वकील, डॉक्टर, शिक्षक, पत्रकार निकले-ज्यादातर ऊँची जातियों से, ऐसे परिवारों से जिनकी स्थिति ठीक-ठाक थी लेकिन बिना नौकरी के गुजारा नहीं हो सकता था.

कई लोग ब्रिटेन गए, जहां उन्होंने उदार और लोकतांत्रिक विचार सीखे. वे सामाजिक सुधार आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े, लेकिन उनका सुधारवाद सीमित था. बदलाव की वकालत करते हुए भी वे अक्सर जाति, धर्म और समुदाय की सीमाओं को बनाए रखते थे.

आजादी के बाद राज्य सबसे बड़ा नियोक्ता बना

आजादी के बाद राज्य सबसे बड़ा नियोक्ता बना और मध्यवर्ग उसका मुख्य हिस्सा. जवाहरलाल नेहरू का मॉडल आर्थिक योजना, उद्योग और सेवाओं पर सरकारी नियंत्रण पर आधारित था. 1956 से 1970 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र में 51 लाख नौकरियां बढ़ीं. संगठित निजी क्षेत्र में 1960 से 1970 के बीच 17 लाख नौकरियां जुड़ीं, लेकिन अगला दशक धीमा रहा, केवल 5 लाख की बढ़ोतरी हुई.

1980 के दशक में नेहरूवादी राज्य की रफ्तार धीमी पड़ने लगी. दुनिया में बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाएं फल-फूल रही थीं. भारत में निजी उद्यम का विस्तार हुआ और लाइसेंस-परमिट राज में दरारें आईं. फिर 1991 में आर्थिक उदारीकरण आया. इससे मध्यवर्ग का आकार और क्रयशक्ति बढ़ी, लेकिन बाजार की अस्थिरता, महंगाई और नौकरी की अनिश्चितता भी सामने आई.

सरकारी नीतियों के केंद्र में Middle Class

आज यह वर्ग कृषि, उद्योग, सेवाओं, बौद्धिक कार्यों और नीति-निर्धारण तक फैला है. ग्रामीण इलाकों में इसमें बड़े किसान, छोटे उद्यमी और वेतनभोगी अफसर शामिल हैं. पिछले 11 वर्षों में सरकारी नीतियों ने मध्यवर्ग को विकास रणनीति के केंद्र में रखा. लक्ष्य—वित्तीय दबाव घटाना, आवास, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा का विस्तार करना और नौकरशाही की जटिलता कम करना.

यह भी पढ़ें- सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश को भारत ने किया खारिज, कहा- अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता यह मामला

सबसे बड़ा बदलाव कराधान में आया. छूट सीमा लगातार बढ़ी, 2020 में सरल कर प्रणाली आई. 2025–26 के बजट में शून्य कर सीमा 12 लाख कर दी गई, ₹75,000 की मानक कटौती के साथ- यानी 12.75 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं. इसकी कीमत- करीब 1 लाख करोड़ का राजस्व नुकसान. अनुपालन आसान हुआ: पहले से भरे हुए रिटर्न, बिना आमने-सामने की जांच, और आईटीआर दाखिल करने वालों की संख्या 2013–14 के 3.91 करोड़ से 2024–25 में 9.19 करोड़ तक पहुंची.

2024 में शुरू हुई यूनिफाइड पेंशन स्कीम 25 साल की सेवा के बाद अंतिम वर्ष के औसत मूल वेतन का आधा पेंशन देती है, साथ ही पारिवारिक पेंशन 60%. यह 23 लाख केंद्रीय और 90 लाख से अधिक राज्यकर्मी को कवर करती है.

Middle Class में शहरी जीवन में बड़ा बदलाव आया

शहरी जीवन में बड़ा बदलाव आया है. स्मार्ट सिटीज मिशन 93% पूरा हो चुका है. पीएमएवाई (शहरी) के तहत 1.16 करोड़ घर स्वीकृत हुए, जिनमें से 92.72 लाख बन चुके हैं. मेट्रो नेटवर्क 2014 के 248 किमी से बढ़कर 2025 में 1,013 किमी हो गया. UDAN योजना के तहत परिचालन हवाईअड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई.

स्वास्थ्य और शिक्षा का दायरा बढ़ा है. आयुष्मान भारत–पीएमजेएवाई 41 करोड़ से अधिक लोगों को कवर करता है. जन औषधि केंद्र 16,469 तक पहुंच गए हैं. 1.63 करोड़ से अधिक लोगों को AI से लेकर मेकाट्रॉनिक्स तक विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण मिला है. डिजिटल शासन आम हो गया है- आधार 141.88 करोड़ लोगों के पास है, डिजी-लॉकर के 52.51 करोड़ उपयोगकर्ता हैं, और UMANG 2,297 सेवाएं बिना किसी कतार के उपलब्ध कराता है.

Also Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस

Shailendra Verma

Recent Posts

पहलगाम की अरु घाटी में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव, आधे सफर से लौटने को मजबूर सैलानी; स्थानीय कारोबार प्रभावित

पहलगाम की अरु घाटी में मोबाइल नेटवर्क, एटीएम, स्वास्थ्य और शौचालय की भारी कमी। सैलानी…

3 hours ago

द ग्रेट मंडल बनाम कमंडल संघर्ष: वह दिन जब बिहार ने आडवाणी की रथ यात्रा रोक दी

Mandal Vs Kamandal: एलके आडवाणी की रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ…

4 hours ago

स्टूडेंट हॉस्टल से CM हाउस तक: वह रात जब लालू ने बिहार की कमान संभाली

Lalu Prasad Yadav: लालू प्रसाद यादव के उभार की कहानी सिर्फ एक राजनेता की जीवनी…

4 hours ago

35 से ज्यादा लग्जरी घड़ियां, अकूत जमीन और 500-500 के नोटों की गड्डियां… बिहार के इस पावर कपल के ठिकानों पर पड़ा छापा

VIGILANCE RAID ON BIHAR OFFICER COUPLE: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance)…

4 hours ago

ठहाका, तेवर और तूफानी राजनीति! जानिए कैसे लालू यादव ने हमेशा के लिए बदल दिए भारतीय लोकतंत्र के नियम

Lalu Prasad Yadav: भारतीय लोकतंत्र में लालू प्रसाद यादव की पहचान एक खास राजनीतिक शैली…

4 hours ago

बदायूं के दोहरे हत्याकांड में चार दोषियों की फांसी की सजा रद्द, जानिए हाईकोर्ट ने क्‍यों उनको किया बाइज्जत बरी

बदायूं के चर्चित दोहरे हत्याकांड (ऑनर किलिंग के मामले) में सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई…

4 hours ago