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ताश के पत्तों की तरह बिखर रही ममता की TMC! सुष्मिता देव का इस्तीफा, फायरब्रांड सयानी घोष भी होंगी बागी?

पश्चिम बंगाल में 15 साल के लंबे शासन के अंत के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर इतिहास का सबसे बड़ा संकट मंडराने लगा है. राज्य में सत्ता गंवाने के बाद से ‘दीदी’ यानी ममता बनर्जी की अपनी पार्टी और संगठन पर पकड़ पूरी तरह ढीली हो चुकी है. बुधवार को टीएमसी को उस वक्त एक और तगड़ा झटका लगा, जब पार्टी की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

बता दें कि महज एक हफ्ते के भीतर सुखेंदु शेखर रॉय के बाद यह दूसरा बड़ा इस्तीफा है. लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है; इनसाइड सूत्रों की मानें तो टीएमसी का सबसे चर्चित और ग्लैमरस चेहरा सयानी घोष भी अब बागी गुट (Mamata Banerjee TMC Internal Rift) के साथ खड़ी हो गई हैं.

बगावत की आग अब संसद तक

पार्टी के भीतर विद्रोह की यह चिंगारी अब दावानल बन चुकी है. बंगाल में टीएमसी के बागी नेता रिताब्रता बनर्जी के समर्थन में 61 विधायकों के आने के बाद जो बगावत राज्य में शुरू हुई थी, वह अब देश की संसद तक पहुंच गई है. कांग्रेस छोड़कर साल 2021 में टीएमसी में शामिल हुईं और राष्ट्रीय प्रवक्ता से लेकर राज्यसभा तक का सफर तय करने वाली सुष्मिता देव का अचानक इस्तीफा देना ममता बनर्जी के लिए बहुत बड़ा पर्सनल सेटबैक है. एक हफ्ते पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा छोड़ा था, जिससे साफ है कि दिल्ली के गलियारों में अब टीएमसी की रीढ़ टूट चुकी है.

20 सांसदों का गुप्त गुट तैयार((Mamata Banerjee TMC Internal Rift)

इस पूरे राजनीतिक ड्रामे (Mamata Banerjee TMC Internal Rift) का सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाला पहलू टीएमसी के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, जादवपुर से लोकसभा सांसद सयानी घोष का नाम सामने आना है. सूत्रों के हवाले से बेहद पक्की खबर है कि सयानी घोष और वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय सहित कुल 20 लोकसभा सांसदों का एक बड़ा गुट ‘दीदी’ के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर चुका है. सयानी घोष टीएमसी का युवा और बेहद आक्रामक चेहरा रही हैं, ऐसे में उनका बागी खेमे में जाना ममता बनर्जी के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है.

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अकेलेपन के सबसे बुरे दौर में ममता

15 साल तक एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी आज अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन और बुरे दौर से गुजर रही हैं. जो सहयोगी कभी उनके इशारे पर जान छिड़कते थे, वो आज डूबते जहाज को छोड़कर भाग रहे हैं. विरोधियों के चौतरफा हमलों के बीच अपनों की इस गद्दारी ने ममता को बिल्कुल अकेला छोड़ दिया है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर यह बगावत तुरंत नहीं थमी, तो आने वाले दिनों में टीएमसी का नामोनिशान मिट सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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