देश

उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी: महाराष्ट्र की सियासत से लेकर इंडिया गठबंधन तक कांग्रेस के लिए नई चुनौती

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है. इस बार केंद्र में हैं दो चचेरे भाई—Uddhav Thackeray और Raj Thackeray —जो वर्षों की दूरी के बाद अब एक मंच पर नजर आ रहे हैं. यह साथ आना केवल ठाकरे परिवार की पारिवारिक राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं. खासकर कांग्रेस पार्टी के लिए, जो महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की प्रमुख साझेदार है और राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन की धुरी मानी जाती है.

ठाकरे-ठाकरे गठबंधन: नये समीकरण, नयी उलझनें

उद्धव ठाकरे ने हाल ही में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह राज ठाकरे के साथ केवल मंच साझा नहीं कर रहे, बल्कि राजनीतिक रूप से भी साथ आने को तैयार हैं. यह घोषणा कांग्रेस के लिए झटका है, क्योंकि राज ठाकरे की छवि एक आक्रामक हिंदुत्ववादी नेता की रही है, जिनकी राजनीति अक्सर उत्तर भारतीयों और हिंदी भाषा के खिलाफ मुखर रही है. ऐसे में उनकी सहभागिता से कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि को झटका लग सकता है.

उत्तर भारत में समीकरणों पर असर

राज ठाकरे की राजनीति महाराष्ट्र के सीमित भूगोल में भले ही प्रभावी हो, लेकिन उनके विचार और बयानों का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी महसूस किया जा सकता है. खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां कांग्रेस, राजद और सपा मुस्लिम और उत्तर भारतीय वोट बैंक पर निर्भर हैं, वहां राज ठाकरे की भूमिका असहजता पैदा करती है. उनके हिंदी-विरोधी बयानों और शिवसेना स्टाइल की राजनीति से यह गठबंधन खटाई में पड़ सकता है.

कांग्रेस में आंतरिक मतभेद

राज को महाविकास अघाड़ी या इंडिया गठबंधन में शामिल करने को लेकर कांग्रेस के भीतर स्पष्ट मतभेद सामने आए हैं. महाराष्ट्र कांग्रेस के कुछ नेता, जैसे प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, इस संभावित गठबंधन से दूर दिख रहे हैं, जबकि सुप्रिया सुले जैसे शरद पवार गुट के नेता मंच पर मौजूद रहे.

उद्धव की रणनीति और कांग्रेस की दुविधा

उद्धव ठाकरे की राजनीति अब पारंपरिक शिवसेना से अलग, धर्मनिरपेक्ष छवि की तरफ बढ़ी है. लेकिन राज ठाकरे को साथ लेकर वो अपनी पुरानी शिवसेना वाली साख को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं. यह रणनीति उन्हें महाराष्ट्र की मराठी अस्मिता और हिंदुत्व के मिश्रण के रूप में फिर से स्थापित कर सकती है. पर इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है.

क्या कांग्रेस राज ठाकरे पर भरोसा करेगी?

राज ठाकरे के लंबे समय तक बीजेपी से रहे समीकरण, नरेंद्र मोदी की तारीफ और वक्त-बेवक्त लिए गए यू-टर्न्स, उन्हें एक भरोसेमंद सहयोगी नहीं बनाते. कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य घटकों के लिए यह सवाल बड़ा है कि क्या वे राज ठाकरे जैसे नेता को साथ लेकर अपने विचारधारा और वोट बैंक दोनों को खतरे में डालना चाहेंगे?

राज ठाकरे की भूमिका इस पर भी निर्भर करेगी कि वो उद्धव ठाकरे की पार्टी में विलय करते हैं या केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित रहते हैं. अगर वो अलग पार्टी के रूप में गठबंधन में शामिल होते हैं, तो विवाद और अधिक गहरा सकता है.


ये भी पढ़ें- ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के लिए भारत तैयार, पीएम मोदी ने बताया एजेंडा


-भारत एक्सप्रेस

प्रशांत त्यागी, वरिष्ठ संवाददाता दिल्ली

Recent Posts

द ट्रेजरी के रखवाले: सुरेश खन्ना ने कैसे तैयार किया यूपी का ट्रिलियन-डॉलर इकोनॉमिक ब्लूप्रिंट?

उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की रणनीति में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, MSME,…

2 minutes ago

अस्पतालों के औचक निरीक्षण से सख्त फैसलों तक: जानिए बृजेश पाठक के ‘हेल्थ मॉडल’ के 5 बड़े बदलाव

UP Budget 2026-27: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के स्वास्थ्य सुधारों का ध्यान अस्पतालों के निरीक्षण, बुनियादी…

5 minutes ago

भीम आर्मी से सांसद बनने की पूरी कहानी: हाथ में संविधान लेकर युवाओं की सबसे बड़ी ताकत कैसे बने चंद्रशेखर?

Western UP Politics: चंद्रशेखर आजाद ने संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, गरिमा, जमीनी सक्रियता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व…

19 minutes ago

बुढ़ापे की पैसों की चिंता खत्म! छोटे व्यापारियों के लिए सरकार की शानदार पेंशन योजना, हर महीने मिलेंगे 3,000 रुपये

छोटे दुकानदारों और स्व-रोजगार से जुड़े लोगों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए…

24 minutes ago

भारत की झोली में सातवां गोल्ड, चीन को हराकर महिला तीरंदाजों ने रचा इतिहास

Asian Games 2026 में भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को 238-234 से हराकर…

28 minutes ago

क्या पेट में अल्सर या हेपेटाइटिस बन सकता है कैंसर का कारण? जानिए 5 खतरनाक इंफेक्शन की पूरी सच्चाई

Health News: दुनियाभर में 2024 में 23 लाख कैंसर केस 5 गंभीर इंफेक्शन से जुड़े…

42 minutes ago