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UGC विवाद में कूदे तेजप्रताप यादव, नए नियमों का किया समर्थन, विरोधियों को दिया करारा जवाब

Tej Pratap yadav on UCC Controversy: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूरे देश में हो रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच बिहार के नेता तेजप्रताप यादवा (Tej Pratap yadav) का बड़ा बयान समाने आया है. जनशक्ति जनता दल (JJP) के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने UGC का समर्थन करते हुए सभी को चौंका दिया है.

तेजप्रताप ने किया नियमों का समर्थन (Tej Pratap Yadav Support UGC)

जनशक्ति जनता दल सुप्रीमों तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, “सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यूजीसी द्वारा लाए गए कानून Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 का स्वागत एवं समर्थन करते हैं”.

कानून को लेकर तेजप्रताप का बयान

तेजप्रताप यादव ने UGC के नए नियम को गरीब, दलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा समाज के छात्रों के हितों में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को लाने मक्स्त है कि देश की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के साथ के नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी का लक्ष्य निर्धारण करना. इसे बेहद सराहनीय कदम बताया.

तेजप्रताप ने छात्रों के हिता में कहा कि यह कानून विश्वविद्यालय और कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को एक समानता प्रदान कर, संविधान में विदित समानत और अदिकार को अधिक मजबूत करता है.

विरोध करने वालों को दिया जवाब

जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप ने कहा, “हमारी पार्टी दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यूजीसी द्वारा लाए गए इस ऐतिहासिक कानून का स्वागत एंव समर्थन करेत हैं.”

तेजप्रताप यादव ने विरोधियों पर हमला करते हुए कहा कि जो लोग इस कानून को सनातन से जोड़कर देख रहे हैं, शायद उन अल्पज्ञानियों को यह पता नहीं है कि दलित, आदिवासी और पिछड़ा समाज भी सनातन के अंतर्गत ही आता है.


ये भी पढ़ें: UGC के नए नियमों पर क्यों मचा बवाल? सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक पूरा विवाद समझिए


नए कानून का क्यों हो रहा है विरोध

यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशन का सेक्शन 3(C) को लेकर बवाल मचा हुआ है. विरोध करने वालों का आरोप है कि यह प्रावधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. नया नियम अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के पक्ष में बनाया गया कानून माना जा रहा है. इसे लेकर पूरे देशभर में सवर्ण समाज और छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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