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भारत की चाल से अमेरिकी किसानों में ‘हाहाकार’, डोनाल्ड ट्रंप की करनी का फल भोग रहे US के अन्नदाता

Donald Trump Tariff: कई बार लोग अपने ही बिछाए जाल में फंस जाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का है. उन्होंने भारत को धमकाने के लिए टैरिफ लगाया था. अब यह उन्हीं के गले की हड्डी बन गया है. अमेरिका ने यह कहते हुए भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा शुल्क लगाता है. लेकिन अब जब भारत ने इसका जवाब अपनी ही चाल से दिया है, तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं. हिंदुस्तान (India Response to Donald Trump Tariff) ने साफ कर दिया है कि अगर कोई हमें छेड़ेगा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे.

अमेरिका ने भारत पर 50% का टैरिफ (Donald Trump America Imposed Tariff On India) लगाकर उसे डराने की कोशिश की, लेकिन अब अमेरिका अपनी ही चाल में फंसता नजर आ रहा है. ट्रंप के टैरिफ का असर अब अमेरिकी किसानों पर पड़ने लगा है, जो परेशान हो गए हैं. अमेरिका को डर है कि भारत कहीं दंडात्मक शुल्क का जवाबी कदम न उठा ले.

व्यापारिक तनाव और इसके प्रभाव

भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर दालों और मसूर के आयात (India Halts Pulse Imports) पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है. भारतीय आयातकों ने नए अनुबंध तो किए हैं, लेकिन अगस्त अंत तक माल लोडिंग रोक दी है. उन्हें आशंका है कि केंद्र सरकार अमेरिका की ओर से लगाए गए दंडात्मक शुल्क का जवाबी कदम उठा सकती है.

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कौन से उत्पाद प्रभावित हो रहे हैं?

अमेरिका से भारत को मसूर, मटर और चना भेजे जाते हैं. ग्रीन मसूर का आयात तमिलनाडु करता है और इन्हें राशन दुकानों के माध्यम से वितरण करता है. पिछले साल 44,000 टन अमेरिकी ग्रीन मसूर भारत आया था. तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में एक खरीदार ने 10,000 टन ग्रीन मसूर खरीदा, लेकिन जहाज पर लोडिंग रोक दी. यही स्थिति अन्य उत्पादों की भी है.

पहले चीन अब भारत की मार

अमेरिकी किसान पहले से ही मुश्किल में हैं क्योंकि चीन ने उनके नए सोयाबीन और मक्का की फसल के लिए कोई बड़ा अनुबंध नहीं किया है. चीन की ओर से मक्का खरीद भी बेहद सीमित रही है, जिससे अमेरिकी किसानों पर दबाव और बढ़ गया है.

अमेरिका को भी होगा नुकसान (Donald Trump Tariff Impact on American farmers)

इस पूरे घटनाक्रम और फैसलों से अमेरिका को ही ज्यादा नुकसान होने वाला है. क्योंकि भारत अमेरिका के लिए कृषि उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. मौजूदा हालात में, व्यापारिक तनाव न केवल अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि भारत में दालों की आपूर्ति और कीमतों पर भी असर डाल सकता है. आने वाले हफ्तों में दोनों सरकारों के रुख पर स्थिति निर्भर करेगी. फिलहाल तो साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप की करनी का फल उनके देश के किसान भोग रहे हैं.

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दोनों देशों को सूझबूझ से लेना चाहिए फैसला

भारत और अमेरिका के बीच चल रहा यह ‘टैरिफ वॉर’ दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है. अमेरिका के टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों को मुश्किल में डाला है, वहीं भारत के जवाबी कदम ने सीधे तौर पर अमेरिकी किसानों को प्रभावित किया है. यह दिखाता है कि वैश्विक व्यापार में एकतरफा फैसले काम नहीं करते और हर कार्रवाई का एक नतीजा होता है. यह सिर्फ एक व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि एक राजनीतिक जंग है, जिसका समाधान दोनों देशों को मिलकर खोजना होगा, वरना इसका खामियाजा आम जनता और किसानों को भुगतना पड़ेगा.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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