Suvendu Adhikari West Bengal Cabinet Decisions: पश्चिम बंगाल में 15 साल के टीएमसी (TMC) शासन का अंत कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई ‘डबल इंजन’ सरकार एक्शन मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही शुभेंदु अधिकारी ने हावड़ा स्थित राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ (Nabanna) में अपनी पहली कैबिनेट बैठक की. इस हाई-लेवल मीटिंग में चुनाव के दौरान किए गए वादों को जमीन पर उतारते हुए 6 बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं.
सबसे बड़ा प्रहार बांग्लादेशी घुसपैठ पर किया गया है, वहीं राज्य के लोगों के लिए स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर भी तिजोरी खोल दी गई है. आइए विस्तार से जानें शुभेंदु सरकार की पहली कैबिनेट के वो फैसले, जो बंगाल की सियासत और व्यवस्था की पूरी तस्वीर बदलने वाले हैं.
बंगाल में अवैध घुसपैठ दशकों से एक नासूर रहा है. इसे जड़ से खत्म करने के लिए शुभेंदु सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट में सबसे बड़ा फैसला लिया है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी (Fencing) को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन सौंपने की प्रक्रिया सोमवार से ही शुरू कर दी है.
मुख्यमंत्री ने सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यह जमीन हस्तांतरण (Land Transfer) अगले 45 दिनों के भीतर गृह मंत्रालय (MHA) को कर दिया जाएगा, ताकि बाड़बंदी का काम पूरा कर घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम कसी जा सके.
ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार का केंद्र के साथ टकराव जगजाहिर था, जिसके कारण बंगाल की जनता ‘आयुष्मान भारत योजना’ के लाभ से वंचित थी. नई सरकार ने इस रोक को हटाते हुए राज्य में आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने का ऐलान किया है. अब बंगाल के लोगों को भी देश के बाकी नागरिकों की तरह 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी.
रोजगार के मुद्दे पर युवाओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने स्कूल शिक्षक की नौकरी के लिए आवेदन करने वालों की आयु सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी कर दी है. चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल के युवाओं से इसका वादा किया था, जिसे पहली ही बैठक में पूरा कर दिया गया.
शुभेंदु अधिकारी ने पिछली सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में अब तक ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) को लागू न करना सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन था. अब बंगाल में भी पूरे देश की तरह पुराने आपराधिक कानूनों की जगह BNS लागू होगी, जिससे न्याय प्रणाली में तेजी और पारदर्शिता आएगी.
पूर्व सरकार ने जून 2025 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी उस सर्कुलर पर रोक लगा दी थी, जो देशव्यापी जनगणना (Census) से संबंधित था. नई कैबिनेट ने इस रोक को हटा लिया है और अब बंगाल में भी केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार जनगणना का काम सुचारू रूप से हो सकेगा.
बंगाल के खूनी चुनावी इतिहास और राजनीतिक हिंसा पर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले 321 कार्यकर्ताओं के मामलों की फाइलें फिर से खुल सकती हैं. अगर पीड़ित परिवार कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं, तो राज्य सरकार इन हत्याओं की निष्पक्ष जांच शुरू करेगी.
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पुलिस महानिदेशक (DGP), मुख्य सचिव और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के जरिए शुभेंदु अधिकारी ने यह साफ संदेश दे दिया है कि बंगाल में अब ‘डबल इंजन’ की सरकार सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम करेगी. कुल मिलाकर एक बात साफ है कि BJP के वादे के मुताबिक सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पहली बैठक में काम करना शुरू कर दिया है.
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