नवीनतम

Bihar Election 2025: महागठबंधन में सीटों की खींचतान, ‘फ्रेंडली फाइट’ से बढ़ेगी टक्कर

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन राज्य में विपक्षी दलों के महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. 6 नवंबर को पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान होना है, गठबंधन के दलों के बीच कई सीटों पर अभी भी सहमति नहीं बन सकी है.

महागठबंधन में है कौन-कौन?

बिहार में महागठबंधन में राजद ,कांग्रेस, सीपीआई (एमएल), सीपीआई, और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) जैसे दल शामिल हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) भी सीमावर्ती इलाकों में हिस्सेदारी चाहता है. लेकिन इन दलों के बीच समन्वय की कमी अब खुलकर सामने आ रही है.

सीट बंटवारे में असहमति और एकतरफा ऐलान

महागठबंधन में शामिल दलों ने एक साझा घोषणा किए बिना अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची घोषित करनी शुरू कर दी है:

कांग्रेस ने 49 सीटों पर उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा की है.

सीपीआई (एमएल) ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं.

वीआईपी ने 15 सीटों पर लड़ने की बात कही है.

राजद ने अनौपचारिक रूप से अपने प्रत्याशियों को सिंबल देना शुरू कर दिया है.

इस जल्दबाज़ी और समन्वय की कमी ने स्थिति को और उलझा दिया है, जिससे कई सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी आपसी मुकाबला होने जा रहा है.

‘फ्रेंडली फाइट’ या अंदरूनी टकराव?

महागठबंधन के भीतर ‘फ्रेंडली फाइट’ का तर्क दिया जा रहा है, लेकिन इसका राजनीतिक नुकसान कांग्रेस और अन्य छोटे दलों को उठाना पड़ सकता है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उन्हें इस बार केवल 61 सीटें दी जा रही हैं, जबकि 2015 में उन्हें 70 सीटें मिली थीं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि कुटुंबा, कहलगाँव, बछवाड़ा, लालगंज और वैशाली जैसी सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी आपस में ही टकरा रहे हैं. कुटुंबा तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की सीट है, जहाँ आरजेडी समर्थित उम्मीदवार भी मैदान में है.

महागठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा की हिस्सेदारी भी अभी तक तय नहीं हुई है. 2024 के झारखंड विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन ने आरजेडी को छह सीटें दी थीं। बदले में जेएमएम अब बिहार की कुछ सीमावर्ती सीटों पर हिस्सेदारी चाह रही है.

इस तरह की असहमति और तालमेल की कमी से यह सवाल उठता है कि क्या महागठबंधन सचमुच भाजपा-जेडीयू गठबंधन को टक्कर देने की स्थिति में है?

कांग्रेस के एक मौजूदा विधायक के अनुसार, “जिन सीटों पर आमने-सामने की टक्कर हो रही है, वहाँ नुकसान तय है. आरजेडी एकतरफा कदम उठा रही है और इसका खामियाजा पूरे गठबंधन को उठाना पड़ सकता है.”

वहीं कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि जैसे बीजेपी ने एलजेपी (रामविलास) को जेडीयू के खिलाफ खड़ा करके आंतरिक चोट दी थी, वैसे ही आरजेडी अब वीआईपी और सीपीआई (एमएल) जैसे दलों को कांग्रेस के खिलाफ खड़ा कर रही है.

एकजुटता की परीक्षा

22 अक्टूबर तक नामांकन वापस लेने का समय है, ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कुछ सीटों पर सहमति बन सकती है. लेकिन अब तक की स्थिति को देखकर कहा जा सकता है कि महागठबंधन इस बार सीट बंटवारे के मोर्चे पर विफल नजर आ रहा है. यदि सहयोगी दलों में सामंजस्य नहीं बना, तो यह चुनाव महागठबंधन के लिए ज्यादा सीटें जीतने के बजाय संकट और आत्ममंथन का कारण बन सकता है.

ये भी पढ़ें- महागठबंधन में बगावत! लालगंज, तारापुर, कहलगांव… इन 10 सीटों पर महागठबंधन की पार्टियां ही आपस में लड़ेंगी चुनाव

-भारत एक्सप्रेस

प्रशांत त्यागी, वरिष्ठ संवाददाता दिल्ली

Recent Posts

भगवा जागरण: उत्तर प्रदेश मंडल की राजनीति से कमंडल के दबदबे तक कैसे पहुंचा

Saffron Politics In UP: उत्तर प्रदेश तब बदला, जब जाति आधारित राजनीति सत्ता की एकमात्र…

9 minutes ago

बीजेपी की नई टीम का चरणबद्ध बदलाव, पुराने दिग्गजों की हुई दमदार वापसी

BJP New National Team: बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में हाल में किए गए फेरबदल को…

22 minutes ago

आखिर क्यों हादसों का हाईवे माना जाता है यमुना एक्सप्रसवे?

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है. ग्रेटर नोएडा में बस आग…

41 minutes ago

क्या है बीजेपी की नई यूपी रणनीति? लखनऊ से लेकर बूथ तक ऐसे बिछ रहा है चुनावी जाल

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने लखनऊ में अपनी संगठनात्मक तैयारियां…

46 minutes ago

दागी नेताओं पर आजीवन चुनाव बैन की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट दागी जनप्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव बैन और लंबित आपराधिक केसों के जल्द निपटारे…

46 minutes ago