बहुचर्चित फिल्म अभिनेता प्रकाश राज को चार अलग-अलग राज्यों में एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) रखने के मामले में बेंगलुरु की एक अदालत से बड़ी राहत मिल गई है. बेंगलुरु की 48वीं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने प्रकाश राज को चार हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी है.
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रकाश राज के खिलाफ पूर्व में जारी किए गए तीन गैर-जमानती वारंटों (Non-Bailable Warrants) को रद्द करने की मांग वाली अर्जी को स्वीकार करते हुए उन्हें निरस्त कर दिया. इससे पहले, 48वीं एसीजेएम अदालत ने अभिनेता को दो बार समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का सख्त निर्देश दिया था.
अदालत द्वारा समन जारी किए जाने के बावजूद प्रकाश राज दोनों ही बार कोर्ट के समक्ष हाजिर नहीं हुए थे. अभिनेता के इस रुख के बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ लगातार तीन बार गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए थे, जिससे उनकी गिरफ्तारी की कानूनी संभावना काफी बढ़ गई थी. अब कोर्ट में पेशी और मुचलका भरने के बाद उन्हें राहत मिल गई है.
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2019 का है, जब बेंगलुरु के एक वकील दिलीप कुमार ने हलासुरु गेट पुलिस स्टेशन (Halasuru Gate Police Station) में अभिनेता प्रकाश राज के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता का गंभीर आरोप है कि अभिनेता के पास देश के चार अलग-अलग राज्यों के मतदाता पहचान पत्र मौजूद हैं, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं.
वकील दिलीप कुमार के अनुसार, साल 2019 में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने इस मामले पर कोई ठोस एक्शन (कार्रवाई) नहीं लिया था. इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर (पुलिस आयुक्त) और भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) से भी संपर्क कर लिखित गुहार लगाई, लेकिन उसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.
अंततः तंत्र से निराश होकर शिकायतकर्ता ने सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रकाश राज को समन और बाद में वारंट जारी किए थे.
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भारत निर्वाचन आयोग के कड़े और स्थापित नियमों के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक पूरे देश में कानूनी रूप से केवल एक ही स्थान या निर्वाचन क्षेत्र पर मतदाता (वोटर) के रूप में पंजीकृत हो सकता है. अदालत में दाखिल शिकायत में यह स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि प्रकाश राज ने नियमों को ताक पर रखकर एक से अधिक स्थानों पर अपने मतदाता पहचान पत्र बनवाए और उनका इस्तेमाल किया, जो सीधे तौर पर देश के चुनावी कानूनों का खुला उल्लंघन है.
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