लीगल

उज्बेकिस्तान में सिरप से 15 बच्चों की मौत के मामले में निर्माता कंपनी के डायरेक्टर को राहत नहीं, अदालत ने खारिज की याचिका

उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौतों की वजह माने गए सीरप निर्माता कंपनी के निदेशक व अन्य अधिकारियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत देने से इन्कार कर दिया है. न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकलपीठ ने मेसर्स मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड और पांच अन्य की आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दिया है. कोर्ट के अनुसार, निदेशक और कंपनी के अधिकारी अपराध के लिए जिम्मेदार हैं और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी(CJM) की अदालत से जारी समन सही है.

कंपनी पर क्या हैं आरोप?

कंपनी पर आरोप है कि उसने औद्योगिक ग्रेड प्रोपाइलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया.यह दवाओं के निर्माण में प्रतिबंधित है। ड्रग्स इंस्पेक्टर ने नमूने लिए। जांच में पाया गया कि एम्ब्रोनोल सीरप और डोक-1 मैक्स सीरप मानक के अनुसार नहीं थे. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 जनवरी 2023 को मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट जारी किया था। इसमें कहा गया कि इन सीरप में डाइइथाइलीन ग्लाइकोल और इथाइलीन ग्लाइकोल की अस्वीकार्य मात्रा है. यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. ग्लाइकोल के सेवन से सीएनएस, कार्डियोपल्मोनरी और रेनल फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने माना कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत लगाए गए आरोपों के आधार पर निदेशक और अधिकारी कंपनी के कामकाज में शामिल हैं. केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि तकनीकी आपत्तियां सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकतीं. कंपनी ने नकली टेस्ट लैब रिपोर्ट बनाई है. यह प्रकरण राज्य बनाम भजन लाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दायरे में नहीं आता. कोर्ट ने याचीगण की याचिका खारिज कर दी। सीजेएम गौतम बुद्ध नगर के 19 जनवरी 2024 के संज्ञान और समन आदेश को सही ठहराया.

याचिका में क्या दलीलें दी गईं

याचीगण ने कहा कि टेस्ट एनालिसिस रिपोर्ट अधूरी है. नमूना लेने की प्रक्रिया गलत है. नमूना बिक्री या वितरण बिंदु से नहीं लिया गया था. आरोपियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। पदनाम से ही उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया. कहा कि जन स्वास्थ्य को हानि के अपराध को तकनीकी आधार पर दरकिनार नहीं किया जा सकता.

कानूनी प्रावधान और सजा

थाना फेज तीन नोएडा में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है. इसमें पांच साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. कोर्ट ने कंपनी और अधिकारियों की याचिकाएं खारिज कर दीं. अब वे सीजेएम कोर्ट में मुकदमे का सामना करेंगे. यह फैसला दवा उद्योग में गुणवत्ता और सुरक्षा के प्रति सख्ती का संकेत देता है.

विशाल तलवार

Recent Posts

200 करोड़ के सुकेश ठगी केस में नोरा फतेही का बयान दर्ज, 30 नवंबर को फिर होगी पेशी; जैकलीन भी गवाह

Sukesh Chandrashekhar Case: महाठग सुकेश चंद्रशेखर के 200 करोड़ रुपये के ठगी मामले में अभिनेत्री…

9 minutes ago

CBSE Board Exam 2027: 10वीं-12वीं की डेटशीट जारी, 16 फरवरी से शुरू होंगी परीक्षाएं

CBSE ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2027 की डेटशीट जारी कर दी है. दोनों…

12 minutes ago

‘दूसरा’ फिल्म पर रोक नहीं, लेकिन कोर्ट की शर्त; सौरभ गांगुली के नाम इस्तेमाल पर देना होगा डिस्क्लेमर

दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म 'दूसरा' की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया…

25 minutes ago

Tarun Tejpal को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दिवाली जेल में ही मनेगी; 10 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार

Supreme Court Bail Rejected: रेप केस में दोषी ठहराए गए तहलका के पूर्व संपादक तरुण…

26 minutes ago

रेखा गुप्ता को कोर्ट से बड़ी राहत, धार्मिक भावना आहत करने वाली याचिका खारिज

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बड़ी कानूनी राहत मिली है. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने…

41 minutes ago