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चांदनी चौक पुनर्विकास समिति पर हाई कोर्ट की फटकार, दिल्ली सरकार आदेश वापस लेगी

दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र के पुनर्विकास के कार्यों की रखरखाव के लिए दिल्ली सरकार द्वारा समिति बनाने पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है. कोर्ट ने सभी पक्षों से हलफनामे के जरिए सुझाव देने को कहा है. कोर्ट 5 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में सुझाव देने के बजाय समिति गठित करने और इसे मंजूर करने पर यह नाराजगी जाहिर की है. मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है.

कोर्ट के फटकार के बाद दिल्ली सरकार ने आश्वासन दिया है कि सरकार अपने आदेश को वापस ले लेगी. कोर्ट के आदेश की अवमानना को लेकर व्यापार मंडल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट से कहा कि समिति बनाने का सरकार का मार्च का आदेश वापस ले लिया जाएगा.

अदालत ने फरवरी 2025 में पुनर्विकास के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का आदेश दिया था. इसके लिए कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव मांगे थे. 21 मई को कोर्ट को बताया गया है दिल्ली सरकार ने अपनी खुद की समिति बना ली है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि माफी मांगते हुए बहस शुरू करूँगा. उन्होंने कहा कि ऐसा नही होना चाहिए था, शायद काम करने और परिणाम देने, शिकायतों को दूर करने और विरासत को बहाल करने के अति उत्साह में उन्होंने दुर्भाग्य से आदेश को गलत तरीके से पढ़ा है.

कोर्ट ने वकील से फरवरी के आदेश पढ़ने को कहा. जस्टिस तुषार राव गेंडेला ने कहा कि आपने न केवल एक समिति बनाई बल्कि उसका कार्यक्षेत्र भी तय किया. दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि हम इस संस्था को तुरंत खत्म कर सकते हैं. हम नए सिरे से शुरूआत करेंगे. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब आप कहते हैं कि क्षेत्र के ऐतिहासिक लोकाचार को बचाने और पुनस्थापित करने के अपने उत्साह में आपने ऐसा किया.

कोर्ट को बार-बार हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा. क्योंकि आप जो भी उत्साह दिखा रहे हैं, उससे वांछित परिणाम नहीं मिल रहा हैं. हर बार जब मामला अदालत में आता है तो आप अपना उत्साह दिखाते हैं. लेकिन क्या आप संतुष्ट हैं या कोई भी दिल्लीवासी संतुष्ट है? आपके द्वारा किए जा रहे जो भी प्रयास है, वे न केवल अपर्याप्त हैं, बल्कि वे शायद सरकार की संकल्पशक्ति की कमी को भी दर्शाता है.

मामले की सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि माननीयन्यायाधीश ने हमें पक्षकार बनाया है, दोनों पक्षों को मिलकर काम करना होगा.

गोपाल कृष्ण

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