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दिल्ली HC ने एमएफ हुसैन की पेंटिंग्स पर FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को किया खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने मशहूर कलाकार दिवंगत एम एफ हुसैन की कथित आपत्तिजनक पेंटिंग्स प्रदर्शित करने को लेकर दिल्ली के एक आर्ट गैलरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

यह याचिका अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने दायर की थी. जस्टिस अमित महाजन ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहले से ही ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है और वहां इसे कंप्लेंट के तौर पर कोर्ट सुनवाई कर रहा है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस स्तर पर पुलिस जांच की जरूरत नहीं है, क्योंकि पेंटिंग्स और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य जरूरी सबूतों को पुलिस ने पहले ही जब्त कर रखा है.

ट्रायल के दौरान किया जा सकता विचार

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि इस चरण पर अपराध की मौजूदगी तय करने के लिए किसी विशेष पुलिस जांच की आवश्यकता नहीं है. प्रमाणिकता, मंशा या सबूतों से छेड़छाड़ जैसे मुद्दों पर विचार ट्रायल के दौरान किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट बीएनएसएस की धारा 225 के तहत पुलिस की सहायता ले सकता है.

हाईकोर्ट ने कहा अब सेशन कोर्ट के आदेश को सही ठहराया और कहा कि याचिकाकर्ता महज फिशिंग और मनमानी जांच कराना चाहती हैं. कोर्ट ने कहा कि न तो न्याय में कोई चूक हुई है और न ही निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी खामी है.

एमएफ हुसैन की पेंटिंग को जब्त करने का आदेश

बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली आर्ट गैलरी से भारतीय चित्रकार एमएफ हुसैन की हिंदू देवी-देवताओं पर बनाई गई दो विवादित पेंटिंग को जब्त करने का आदेश दिया है. पेंटिंग में हिंदू देवता हनुमान और गणेश हैं. शिकायतकर्ता अमित सचदेवा ने कहा था कि ये पेंटिंग्स आपत्तिजनक प्रकृति की है और नग्न हैं. उन्होंने दिल्ली पुलिस को संबंधित पेंटिंग्स को जब्त करने का निर्देश देने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने आपत्तिजनक पेंटिंग्स को प्रदर्शित करने के लिए दिल्ली आर्ट गैलरी और उसके निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की है.

पेंटिंग से हनुमान व गणेश जी का किया अपमान

निचली अदालत में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने अदालत से कहा था कि हुसैन की पेंटिंग सनातन धर्म के सबसे पूजनीय देवता हनुमान और गणेश का अपमान किया गया है. यह अश्लीलता है. ऐसा किया जाना दुर्भावनापूर्ण है और यह जानबूझकर किया गया अपमान है.

हुसैन दुनिया के सबसे महान कलाकार हो सकते हैं, लेकिन उन्हें मेरे देवताओं का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा था कि हजारों लोगों ने देवताओं का उपहास करने वाली पेंटिंग देखी. प्रथम दृष्टया मामला सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए ऐसी आपत्तिजनक पेंटिंग को प्रदर्शित करने एवं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का बनता है.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, अस्पताल और स्कूलों की जमीन पर धार्मिक स्थल व दुकानों के अतिक्रमण का मामला

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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