लीगल

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; EWS और DG छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए नकद सहायता देने की नीति को दी मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह (DG) के छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म सीधे देने के बजाय उसके एवज में नकद वित्तीय सहायता देने की दिल्ली सरकार की नीति को बरकरार रखा है. अदालत ने एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नीतिगत मामलों में अदालत का दखल तभी उचित माना जाता है, जब वह फैसला पूरी तरह से मनमाना या बिना किसी तार्किक आधार के हो.

अदालत की मुख्य टिप्पणियां और फैसला

नीतिगत फैसलों में सीमित हस्तक्षेप: कोर्ट ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म के बदले नकद सहायता देने की व्यवस्था को पूरी तरह से मनमाना, सनकी या आधारहीन नहीं कहा जा सकता. अदालत के अनुसार, किसी नीतिगत फैसले में न्यायिक हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है जब वह इतना अतार्किक हो कि उससे अदालत की अंतरात्मा झकझोर जाए.

यह फैसला ‘जस्टिस फॉर ऑल’ नामक एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर आया है. एनजीओ ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें दिल्ली सरकार की उस नीति को स्वीकार किया गया था जिसके तहत यूनिफॉर्म की भौतिक आपूर्ति के स्थान पर प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जाती है.

आरटीई अधिनियम का संदर्भ

याचिका में ‘बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ के तहत दिल्ली के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में EWS और DG श्रेणियों के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य पठन-पाठन सामग्री उपलब्ध कराने के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करने की मांग की गई थी.

दिल्ली सरकार की दलीलें

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट को बताया कि स्कूलों के लिए अलग से यूनिफॉर्म खरीदना और उनका सही वितरण करना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है, जिससे शिक्षा विभाग और स्कूलों पर अनावश्यक रूप से भारी प्रशासनिक बोझ पड़ता है.

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में अमूमन छह महीने का वक्त लग जाता है. इसके अलावा, अलग-अलग निजी स्कूलों की यूनिफॉर्म के डिजाइन, रंग और उसकी विशिष्टताएं भी एक-दूसरे से भिन्न होती हैं, जिससे केंद्रीकृत स्तर पर यूनिफॉर्म की खरीद और आपूर्ति करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है.

ये भी पढ़ें: लसोड़ा… नाम तो सुना होगा! सेहत के लिए फायदे भी जानें, थाली का स्वाद और बीमारियों की छुट्टी

कोर्ट का पिछला निर्देश और नई नीति

अदालत ने गौर किया कि दिल्ली सरकार ने 10 जून 2025 को एक नई नीति तैयार की थी, जिसके पीछे मुख्य कारण यूनिफॉर्म की खरीद और उसके भौतिक वितरण में आने वाली प्रशासनिक कठिनाइयां थीं. इस नीति को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट ने इस साल जनवरी में अपने 13 अप्रैल 2023 के पुराने आदेश में संशोधन किया और सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि छात्रों को संबंधित नीति के तहत यूनिफॉर्म खरीदने के लिए पर्याप्त और समय पर राशि मिल सके.

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

2047 के विकसित भारत में खेल निभाएंगे अहम भूमिका, नई दिल्ली में आयोजित स्पोर्ट्स CSR समिट में बोले दिग्गज

नई दिल्ली के PHD हाउस में आयोजित स्पोर्ट्स CSR Summit में खेल राज्य मंत्री रक्षा…

24 minutes ago

हबीब-उर-रहमान को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, तीन साल से बंद आरोपी की जमानत याचिका ने ठुकराई

दिल्ली हाईकोर्ट ने सैन्य खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपी हबीब-उर-रहमान की जमानत याचिका खारिज…

31 minutes ago

वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा दर्जा देने की मांग, सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और स्कूलों में इसे अनिवार्य…

37 minutes ago

मेगा मिलेनियम के ठिकानों पर ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी, करोड़ों की विदेशी और भारतीय करेंसी बरामद

ईडी ने मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मुंबई, दिल्ली और महाराष्ट्र के ठिकानों पर…

56 minutes ago

अडानी पावर का बड़ा धमाका! दूसरी तिमाही में मुनाफा 142% बढ़कर ₹7,019 करोड़, कमाई में भी जबरदस्त उछाल

अडानी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना…

1 hour ago