Land for Job case Lalu Yadav
Land for Job case Lalu Yadav: लैंड फॉर जॉब से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है. इस याचिका में उन्होंने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है.
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी. वराले की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया. लालू यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि अब इस मामले में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर की जाएगी.
लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिका में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके चलते सीबीआई की जांच या एफआईआर को रद्द किया जा सके.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में लालू यादव की ओर से कहा गया था कि सीबीआई ने आवश्यक सरकारी मंजूरी (सेंक्शन) के बिना एफआईआर दर्ज की, जो कानून के अनुरूप नहीं है. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज किए जाने के समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री के रूप में अपने आधिकारिक दायित्वों से जुड़े मामलों के संदर्भ में कार्रवाई के दायरे में आते थे, इसलिए आवश्यक मंजूरी के बिना दर्ज एफआईआर वैध नहीं मानी जा सकती.
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इससे पहले भी लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट से निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया था. याचिका में यह भी कहा गया था कि पहले की जांच और उसकी क्लोजर रिपोर्ट को छिपाकर नई जांच शुरू की गई, जो कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है. साथ ही, कार्रवाई को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया गया था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने 29 मई 2025 को अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि मामले की कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस आधार नहीं है. अदालत ने कहा था कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच और ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए.
सीबीआई ने इस मामले में दाखिल अंतिम सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कुल 78 लोगों को आरोपी बनाया है. एजेंसी के अनुसार इनमें 38 अभ्यर्थी, कुछ सरकारी अधिकारी और अन्य लोग शामिल हैं. सीबीआई ने 6 मार्च को तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लालू यादव के पूर्व निजी सचिव भोला यादव को भी आरोपी बनाया गया.
सीबीआई के पूरक आरोपपत्र के अनुसार, भोला यादव लालू प्रसाद यादव के सचिव के रूप में कार्य करते थे और कथित तौर पर विभागीय अधिकारियों को निर्देश देने सहित कई प्रशासनिक कार्यों का समन्वय करते थे. जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.
लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा उनके परिवार के पांच सदस्य भी आरोपी हैं. इनमें राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव शामिल हैं.
सीबीआई से जुड़े इस मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने 4 अक्टूबर 2023 को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को जमानत दे दी थी. इससे पहले 22 सितंबर 2023 को अदालत ने सीबीआई की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लिया था.
अब सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने के बाद लालू प्रसाद यादव की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी. ऐसे में इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत एक्सप्रेस
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