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दिल्ली हाई कोर्ट ने AFMS पोस्ट ग्रेजुएट सीटों में समान अवसर और पारदर्शिता के लिए केंद्र को नोटिस जारी किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के पूर्व अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है. यह याचिका मेजर (रिटायर्ड) आशीष कुमार पांडे सहित अन्य की ओर से दायर की गई है. जिसपर सुनवाई के बाद जस्टिस विकास महाजन ने केंद्र सरकार, रक्षा मंत्रालय और मेडिकल काउंसिल कमेटी को नोटिस जारी किया है. कोर्ट 7 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट से आग्रह किया है कि जब तक मामला कोर्ट में लंबित हैं, काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए या इसे न्यायिक निगरानी में संचालित किया जाए, ताकि पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित हो सके. याचिकाकर्ता की ओर से पेश सत्यम सिंह राजपूत और नीमा सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों के आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाया है. उन्होंने मांग की है कि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा संस्थानों में एमडी/एमएस/ डीएनबी कोर्स के लिए प्रायोरिटी IV को समान अवसर दिया जाना चाहिए.

पूर्व अफसरों को सीमित अवसर मिलने की चिंता

दायर याचिका में कहा गया है कि यह नीति सेवा करने वाले अधिकारियों को सजा देने जैसी है क्योंकि कम रैंक वाले नागरिक उम्मीदवार प्रायोरिटी के नाम पर उच्च विषयों में सीट पा रहे हैं. जबकि युद्ध और सीमावर्ती इलाकों में सेवा दे चुके पूर्व अफसरों को न के बराबर अवसर मिलते हैं. याचिकाकर्ता की मांग है कि पोस्ट ग्रेजुएट सीटों का प्रायोरिटी-IIIऔर IV में में अनुपातिक वितरण सुनिश्चित किया जाए. रैंक वाइज अलॉटमेंट लिस्ट और पात्रता सूची सार्वजनिक की जाए.

परीक्षा के बाद माइग्रेशन पर रोक लगाने का प्रस्ताव

परीक्षा के बाद प्रायोरिटी -I से IV में माइग्रेशन पर रोक लगे. साथ ही रिलीज या एनओसी आवेदनों की पूरी सूची हर वर्ष परीक्षा से पहले DGAFMS की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए. बता दें कि नीट-पीजी 2025 के लिए एएफएमसीसंस्थानों में कुल 417 सीटें निर्धारित की गई हैं. इनमें से 210 सीटे सिर्फ प्रायोरिटी-I के लिए आरक्षित है जबकि बाकी 207 सीटें अप्रतिबंधित रखी गई है. जिन पर प्रायोरिटी-II से V (विदेशी छात्र, केंद्रीय सरकारी डॉक्टर, पूर्व सेवारत अधिकारी और नागरिक) सभी दावा करते है.

ये भी पढ़ें- स्वामी चैतन्यानंद की ओर से दायर अर्जी पर फैसला सुरक्षित, पटियाला हाउस कोर्ट 14 अक्टूबर को सुनाएगा फैसला

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– भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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