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तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई चार्जशीट के लिए लोकपाल की मंजूरी को रद्द कर दिया है. लोकपाल ने कैश फॉर क्वेरी विवाद के सिलसिले में सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया है.

नकदी और उपहार स्वीकर करने का आरोप

दायर याचिका में महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में अपने खिलाफ दायर चार्जशीट दायर करने के लिए सीबीआई को मंजूरी देने के लोकपाल के आदेश को चुनौती दी है. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि निगरानी संस्था ने गलत तरीके से सीबीआई को उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी, जिसमें उन पर संसद में प्रश्न पूछने के बदले में व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से नकदी और उपहार स्वीकर करने का आरोप है.

12 नवंबर को लोकपाल की पूर्ण पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20(7)(A) उपधारा धारा 23 (1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सीबीआई को चार सप्ताह में महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी और कहा था कि चार्जशीट के एक कॉपी उसके सामने भी पेश की जाए.

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन

महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लोकपाल का आदेश लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के खिलाफ है और वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह उनके विस्तृत लिखित और मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार किए बिना पारित किया गया है.

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल और सीबीआई को निर्देश दिया था कि वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कथित रूप से धन के बदले संसद में प्रश्न पूछने के मामले में चल रही लोकपाल कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखना सुनिश्चित करें.

गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य

अदालत ने मोइत्रा की याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि लोकपाल व सीबीआई को 5 जून को जारी परिपत्र के निर्देशों के साथ वैधानिक प्रावधानों के अनुसार गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है. लोकपाल को सौंपी गई सीबीआई की रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई थी.

इस मामले में आचार समिति ने मोइत्रा को दोषी ठहराया था और बाद में उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा सांसद के पद से निष्कासित कर दिया गया था. उन पर व्यवसायी और मित्र दर्शन हीरानंदानी की ओर से प्रश्न पूछने के बदले नकद प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था.

ये भी पढ़ें: पटियाला हाउस कोर्ट स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट ने जहूर और नाजिर को UAPA के तहत ठहराया दोषी

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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