दिल्ली हाई कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी और अलगाववादी नेता यासीन मलिक को देरी से याचिका दायर करने पर जवाब देने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने एनआईए से जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है. कोर्ट 22 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस नवीन चावला की कोर्ट एनआईए की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है.
निचली अदालत ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के मामले में यूएपीए और आईपीसी के विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनवाई थी. जिसके बाद एनआईए ने फांसी की सजा की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है.
हालही में पाकिस्तान में रहने वाली उसकी बीवी मुशाल हुसैन मलिक ने अपने शौहर को लेकर भारत को बड़ी धमकी दी है. पाकिस्तान में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में मुशाल ने कहा कि अगर यासीन मलिक को फांसी की सजा सुनाई जाती है तो भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमले कराए जा सकते हैं. मुशाल ने दावा किया कि आत्मघाती हमलावर भारत पर अटैक के लिए एकदम तैयार बैठे हैं.
पिछली सुनवाई के दौरान यासीन मलिक तिहाड़ जेल से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर कहा था कि एनआईए द्वारा मौत की सजा के लिए अपील दायर किए तीन साल हो गए हैं. साथ में ये भी कहा था कि किसी व्यक्ति को इस तरह असमंजस में रखना कि उसे मौत की सजा मिलेगी या नहींं एक मानसिक यातना है.
इसके साथ ही पिछली सुनवाई में यासीन मलिक ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया था कि वह मामले में खुद बहस करेंगे. वह किसी वकील के माध्यम से बहस करना नहींं चाहते है. बल्कि व्यक्तिगत रूप से मामले पर बहस करेंगे. हाईकोर्ट ने यासीन मलिक से पूछा था कि क्या वह केस कानूनों और दस्तावेजों पर जवाब दाखिल करना चाहते हैं.
यासीन मलिक ने कोर्ट से यह भी कहा था कि उन्हें इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए. जिसके बाद कोर्ट ने यासीन मलिक को समय दे दिया था. याचिका में कहा गया था कि ओसामा बिन लादेन के तर्ज पर यासीन मलिक को फांसी की सजा होनी चाहिए.
इससे पहले 11 जुलाई को हाई कोर्ट के जज जस्टिस अमित शर्मा ने मामले से खुद को अलग कर लिया था. क्योंकि वो एनआईए की तरफ से 2010 में बतौर अभियोजक के तौर पर पेश हो चुके है. जिसके बाद मामले को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया था.
पिछली सुनवाई में एनआईए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यासीन मलिक ने फांसी की सजा से बचने के लिए बड़ी चालाकी से अपना अपराध कबूल कर लिया. अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी जबकि उसके खिलाफ इस तरह का अपराध है जिसके तहत फांसी की सजा होती है. इस तरह से कोई आतंकवादी वारदात कर गुनाह कबूल कर लेगा और फांसी की सजा से बच जाएगा.
बता दें कि 25 मई 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने हत्या और टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने यासीन मलिक पर यूपीए की धारा 17 के तहत आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये का जुर्माना जुर्माना लगाया था. 10 मई 2022 को यासीन मलिक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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