दिग्गज कारोबारी अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) से जुड़े बैंक फ्रॉड और वित्तीय मामलों को अलग-अलग हाई कोर्ट्स से दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 21 सितंबर को सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अलग-अलग हाई कोर्ट्स में लंबित मामलों की पूरी जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया था.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड से जुड़े कथित तौर पर बैंकों से लिए गए फंड के डायवर्जन और दुरुपयोग को लेकर कई याचिकाएं अलग- अलग हाई कोर्ट में लंबित है. दिल्ली हाई कोर्ट में लगभग एक दर्जन मामले लंबित है.
कोर्ट ने पूछा था कि दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर क्यों मांगा जा रहा है और कहा था कि हमें एक हाई कोर्ट को दूसरे पर क्यों तरजीह देनी चाहिए?. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका ठंडे बस्ते में चली गई है, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट में मामला सुनवाई के लिए तैयार है.
हुसैन ने कोर्ट को यह भी बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी जीएसटी एक्ट की धारा 171 को चुनौती देने वाले हाई कोर्ट के मामलों को दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया. उन्होंने आग्रह किया था कि ब्लैक मनी एक्ट के मामले में भी उसी मिसाल का पालन किया जाए. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि पहले दिल्ली हाई कोर्ट से फैसला आने दीजिए.
उन्होंने यह भी कहा था कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट में मामले में अंतिम सुनवाई के लिए तैयार है और वहां कार्यवाही में देरी नहीं हो रही है, तो पहले वहां से फैसला आने दीजिए. इसके बाद उस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में मिशाल के तौर पर पेश किया जा सकता है.
सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा था कि फैसला सरकार में खिलाफ आए या उसके खिलाफ, पहले दिल्ली हाई कोर्ट से मामले का निपटारा होना जरूरी है. इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट से मामले को जल्द निपटारा करने के लिए कहा जा सकता है. आयकर विभाग की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट को बताया एक ही तरह के मुद्दों पर अलग-अलग हाई कोर्ट मेसमानांतर कार्यवाही चलने से मुकदमों की संख्या बढ़ रही है.
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 139 A (2) का हवाला देते हुए कहा कि इसी तरह की परिस्थितियों में मामलों को एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि मामला केंद्रीय कानून यानी ब्लैक मनी एक्ट से जुड़ा है. लंबे समय तक मामलों पर रोक रहने से विदेशों में जमा कथित काले धन को वापस लाने के कानून के उद्देश्य पर असर पड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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